गौरा को किसी से शिकायत नहीं थी
गाँव में सब उसे जानते थे. कोई उस के पास सब्जी लेने आता तो वह रास्ते भर की खबर भी पूछ लेती. किसी के घ... Read more

गाँव में सब उसे जानते थे. कोई उस के पास सब्जी लेने आता तो वह रास्ते भर की खबर भी पूछ लेती. किसी के घ... Read more
गाँव में सब उसे जानते थे. कोई उस के पास सब्जी लेने आता तो वह रास्ते भर की खबर भी पूछ लेती. किसी के घ... Read more
सुन्दर चन्द ठाकुर कवि, पत्रकार, सम्पादक और उपन्यासकार सुन्दर चन्द ठाकुर सम्प्रति नवभारत टाइम्स के मु... Read more
तुम्हारी निश्चल आंखेंचमकती हैं मेरे अकेलेपन की रात के आकाश मेंप्रेम पिता का दिखाई नहीं देताईथर की तर... Read more
“क्या हुआ चचा जान? बड़े बेउम्मीद-बेसहारा से दिख रहे हो!”(Shayar Satire by Priy Abhishek) “यार, शेर ल... Read more
दिन भर की थकी हारी आमा जैसे ही सूरज डूबने के बाद घर में घुसी तो देखा किशन अंदर चारपाई पर पसरा हुआ है... Read more
गाँव में सब उसे जानते थे. कोई उस के पास सब्जी लेने आता तो वह रास्ते भर की खबर भी पूछ लेती. किसी के घ... Read more
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