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1 Comments

  1. मृगेश

    जो था वह सरलता से लिख दिया।
    फिल्म तो बड़ी गहरी है
    मैं तो खूब फ़िल्में देखता आया और छटपटाया ऊबता भी रहा
    पाताल टी देखी तो लगा
    कि
    बनाने वाले की सोच कितनी साफ है
    और इसे उतार सामने रख देने का
    माध्यम उसने कितना सही चुना
    मैंने कठिन चढ़ाईयां भी चढ़ी थीं पहाड़ पे
    तो वह याद आ जीवंत हो उठी
    हौसला दे गईं फिर
    अब तो शाबासी देने का हक है मुझे
    कि अपने साथी निकोन के वाइड और टेली लेंस से
    पहाड़ का तलाऊं -उपरांऊ, हिम -रौखड़ खूब जी भर खींचा
    और जो छायाँकन यहां पाया उसने मन भिगा दिया
    बहुत बढ़िया खूब रचा बड़ा मर्मस्पर्शी रचा
    जी रैया जागी रैया।

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