छूट जाता है सब-कुछ छूट जाता है सब-कुछ, पर घर छूटता नहीं… इस बात पर मुझे बेपनाह यकीन था. इस यकीन के कायम होने के पीछे कई कारण थे. हर त्योहार पर सब का हर हाल में घर पहुंच जाना इसे सब से... Read more
पंतनगर विश्वविद्यालय: हरित क्रांति की वह कहानी, जिस ने भारत के गाँवों की तस्वीर बदल दी
एक ऐतिहासिक यात्रा : कृषि, विज्ञान और किसानों के सपनों की कहानी (Pantnagar University Green Revolution) आज जब हम भारत को दुनिया के प्रमुख खाद्यान्न उत्पादक देशों में गिनते हैं, तो शायद ही कभ... Read more
मनुष्य होने का मतलब क्या है? एआई से पूछें? लगता तो ऐसा ही है कि उसे ही यह ज़हमत देनी पड़ेगी. जब यह कविता लिख सकता है, संगीत रच सकता है, तर्क-कुतर्क खड़ा कर सकता है यानी हर वह काम करने पर आमा... Read more
उत्तराखंड के पहाड़ों का कटु सत्य है पायर “चिता”
विनोद कापड़ी द्वारा निर्मित चर्चित फ़िल्म पायर “चिता” पूरे देश में रिलीज गई है. 26 साल पहले जब उत्तराखंड राज्य बना था तब शायद विनोद कापड़ी और राज्य के लोगों ने सपने में भी नहीं स... Read more
डॉ. रघुनन्दन सिंह टोलिया: उत्तराखंड के इतिहास, समाज और अर्थव्यवस्था को समझने की एक दृष्टि
पिछली कड़ी : धन सिंह राणा ‘संघर्षनामा’ डॉ. रघुनन्दन सिंह टोलिया की पुस्तक, “द कुमाऊं हिमालया : आस्पेक्ट्स ऑफ हिस्ट्री, कल्चर एंड इकोनॉमी” कुमाऊं-गढ़वाल क्षेत्र पर लिखे गए निबंधों... Read more
पहाड़ का वह बूढ़ा पिता
पहाड़ के एक छोटे-से गाँव में एक पिता रहता था. उम्र अब ढलने लगी थी, लेकिन उसकी आँखों में आज भी अपने बच्चों के लिए वही प्यार था, जो कभी उनके बचपन में हुआ करता था. (Old Father from Mountains) उ... Read more
कुमाऊं में रामलीला की परम्परा
सांस्कृतिक परम्परा की दृष्टि से उत्तराखण्ड एक समृद्ध राज्य है. समय-समय पर यहां के कई इलाकों में अनेक पर्व और उत्सव मनाये जाते हैं. लोक और धर्म से जुड़े इन उत्सवों की आस्था समाज के साथ बहुत ग... Read more
‘पायर’ फिल्म के सुलगते सवाल…
जाने-माने पत्रकार, साहित्यकार और फिल्म निर्देशक विनोद कापड़ी से कल शाम मुलाकात हुई. दरअसल,उनके निर्देशन में बनी फिल्म ‘पायर’ (चिता) इन दिनों बागेश्वर में मोबाइल थिएटर के माध्यम से... Read more
उत्तराखंड की सांस्कृतिक राजधानी अल्मोड़ा के मुख्य आकर्षण में से एक रामलीला का मंचन इन दिनों अल्मोड़ा के विभिन्न मंचों में किया जा रहा है. अल्मोड़ा की रामलीला जिसे यूनेस्को द्वारा भी मान्यता... Read more
‘पायर’ पहाड़ की ठोस पीठ है
लोग इसे पहाड़ और पलायन की कहानी की तरह देखेंगे. लोग इसे खंडहर होते जा रहे मकानों, परित्यक्त गांवों और अकेले पड़ते जा रहे बूढ़े मां बाप की टीस की तरह देखेंगे. ज़ाहिरा तौर पर पायर ऐसी ही दिखती... Read more


























