अब हल्द्वानी में पहाड़ी उत्पादों के सबसे विश्वसनीय ब्रांड ‘मुनस्यारी हाउस’ की शुरुआत
आपको मुनस्यारी की दुर्लभ राजमा कि तलाश है या फिर कुमाऊं-गढ़वाल के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में पैदा होने वाली जड़ी-बूटियों या मसालों की, या फिर विभिन्न प्रजाति के चावल या दालों की, आपकी मंजिल... Read more
कौन थे पाशुपत संप्रदाय के पुरोधा ‘लकुलीश’?
पाशुपत संप्रदाय के पुरोधा भगवान लकुलीश को भारतीय शैव परंपरा के विकास में एक अत्यंत महत्वपूर्ण व्यक्तित्व माना जाता है. वे उस दौर के आचार्य थे, जब शिव की उपासना लोक आस्था से आगे बढ़कर संगठित... Read more
नीब करौरी धाम को क्यों कहते हैं ‘कैंची धाम’?
अगर आप कभी नैनीताल या अल्मोड़ा की तरफ़ यात्रा पर निकले हों तो रास्ते में “कैंची धाम” का नाम ज़रूर सुना होगा. दुनिया भर में ये “नीब करौरी धाम” नाम से प्रसिद्धी पा चुका धार्मिक स्थल है. अक्सर... Read more
उत्तराखंड की पहाड़ियाँ जितनी शांत और सुंदर हैं, उतनी ही रहस्यमय भी. यहाँ के गाँवों में आज भी कुछ परंपराएँ जीवित हैं जो देवता, विश्वास और डर — तीनों को एक साथ जोड़ती हैं. ऐसी ही एक परंपरा है... Read more
परम्परागत घराट उद्योग
वस्तुतः घराट को परम्परागत जल प्रबंधन, लोक विज्ञान और गांव-समाज की सामुदायिकता का अनुपम उदाहरण माना जाता है. सही मायने में ये घराट ग्रामीण आत्मनिर्भरता और पर्यावरण सम्मत कुटीर उद्योग के प्रती... Read more
यो बाटा का जानी हुल, सुरा सुरा देवी को मंदिर…
मुनस्यारी में एक छोटा सा गांव है सुरिंग. गांव से कुछ तीन किलोमीटर की खड़ी चढ़ाई पर नंदा देवी का मंदिर है. बचपन में पिताजी हर साल अपने साथ नंदाष्टमी पर सुरिंग ले जाया करते थे. पिताजी का पूरा... Read more
बिरुण पंचमि जाड़ि जामलि, बसंतपंचमि कान कामलि
पहाड़ों में इन दिनों होता है आनन्द और उत्सव का माहौल. अगले कुछ दिन गाँव के लोग मिलकर आंगन में खेल लगाते नज़र आयेंगे. अनेक तरह के लोकगीत जैसे – झोड़े, झुमटा, चांचरी आदि गाते पहाड़ी झूमते नज़र... Read more
आधुनिक चिकित्सा पद्धति एलोपैथी की शुरूआत तो उन्नीसवीं शताब्दी में हुई और देश में तो इसकी पहुंच आमजन तक स्वतंत्रता की प्राप्ति के बाद तक भी बहुत सीमित थी. उस दौर में शुद्ध खान-पान, स्वच्छ पर्... Read more
हमारा लोकपर्व घ्यूं त्यार है आज
अपनी विशिष्ट लोक परम्पराओं से उत्तराखंड के लोग अपने समाज को अलग खुशबू देते हैं. शायद ही ऐसा कोई महिना हो जब यहां के समाज का अपना कोई विशिष्ट त्यौहार न हो. ऐसा ही लोकपर्व आज घी त्यार या घ्यूं... Read more
कल हरेला है
पहाड़ियों के घर में आज हरेला तैयार हो चुका होगा. हरेला यानी पांच या सात प्रकार के अनाजों की हरी-पीली लम्बी पत्तियां. कल हरेले की पूजा होगी और हरेला काटा भी जायेगा. काटने के बाद पहाड़ी इसे अप... Read more



















