सागर से शिखर तक : स्वामी मन्मथन
पिछली कड़ी : बद्रीदत्त पांडे और इंद्र सिंह नयाल ने रखा था ‘उत्तराखंड राज्य की संकल्पना’ का वैचारिक आधार गढ़वाल में सामाजिक सुधार व चेतना जाग्रत करने में स्वामी मन्मथन का योगदान नवोत्थान के स... Read more
बद्रीदत्त पांडे और इंद्र सिंह नयाल ने रखा था ‘उत्तराखंड राज्य की संकल्पना’ का वैचारिक आधार
पिछली कड़ी : पहले समाज बदलो, राज्य अपने आप सार्थक हो जाएगा : इंद्र सिंह नयाल इन्द्र सिंह नयाल ने क्षेत्रीय अस्मिता के आधार से पृथक पहाड़ी राज्य की अवधारणा रखी तथा सांस्कृतिक-भौगोलिक विशिष्टत... Read more
पिछली कड़ी : कुमाऊं केसरी बद्रीदत्त पांडे का बहुआयामी व्यक्तित्व व कृतित्व : इतिहास से जनआंदोलन तक कुमाऊं गढ़वाल के लिए अलग प्रशासनिक व्यवस्था व प्रथक पहाड़ी राज्य की संकल्पना को वैचारिक आधा... Read more
कुमाऊं केसरी बद्रीदत्त पांडे का बहुआयामी व्यक्तित्व व कृतित्व : इतिहास से जनआंदोलन तक
पिछली कड़ी : हिमालय की सामाजिक-आर्थिक संरचना पर प्रोफेसर पूरन चंद्र जोशी कुमाऊं को विशिष्ट संस्कृति युक्त राजनीतिक इकाई के रूप में रखते हुए राष्ट्रवादी दृष्टिकोण के साथ इतिहास के गौरव और अस्... Read more
पिछली कड़ी : कुमाऊं का सबसे बड़ा सामाजिक समूह “खस” रहा : आर. डी. सनवाल सन 1928 में अल्मोड़ा के दिगोली गांव में जन्म हुआ पूरन का, तीनों ओर से घिरे हुए पहाड़, पेड... Read more
पिछली कड़ी : सोशियल इकोनॉमी ऑफ हिमालय : हिमालय की सामाजिक अर्थव्यवस्था का आरंभिक अकादमिक अध्ययन कुमाऊं में जाति व भूमि के संबंध का विश्लेषण करने वाले अनुसन्धान के जनक रहे राम दत्त सनवाल (192... Read more
सोशियल इकोनॉमी ऑफ हिमालय : हिमालय की सामाजिक अर्थव्यवस्था का आरंभिक अकादमिक अध्ययन
पिछली कड़ी : उत्तराखंड राज्य की अवधारणा किसी एक नेता या आंदोलन से नहीं बनी हिमालय की सामाजिक अर्थव्यवस्था का आरंभिक अकादमिक विश्लेषण श्याम दत्त पंत ने किया. उन्होंने ब्रिटिश काल में उच्च शिक्... Read more
पिछली कड़ी : एटकिंसन : पहाड़ आधारित प्रशासन का निर्माता हिमालय को जानने समझने व पहाड़ की समस्याओं को समझने की दृष्टि चार पीढ़ियों में विकसित हुई. एटकिंसन का हिमालयन गजेटियर (1882-86) कुमाऊं-... Read more
एटकिंसन : पहाड़ आधारित प्रशासन का निर्माता
तत्कालीन नार्थ वेस्टर्न प्रोविनेंस यानी उत्तर प्रदेश के जिस ब्रिटिश अधिकारी ने उन्नीसवीं शताब्दी के उत्तरार्ध में सेवारत रहते हुए पहाड़ी क्षेत्रों के लिए विशेष व्यवस्था और भिन्न स्वरूप का प्... Read more
उत्तराखंड के आय व्यय लेखे 2026-27 को समझते हुए यह आशंका उभरती है की क्या यह पुलिंदा पहाड़ की खेती, छोटे उद्योग व स्थानीय आर्थिकी को संरचनात्मक आधार प्रदान करता है या फिर मात्र घोषणाओं क... Read more


























