वह माला के गेट पर सुबह-शाम पहरा देते मिलता
माला नाम था उसका. छरहरी काया, बला की ख़ूबसूरत. लेडीज साइकिल से जब कॉलेज आती, बालों में कलरफुल स्कार्फ बाँधे कयामत ढाती थी. लड़के उसकी एक झलक पाने को उतावले रहते थे, पर वह नाक की सीध में चलती... Read more
खड़कमाफी के जंगलों और आबादी के बीच पिछले लगभग एक दशक से एक परिचित छाया विचरती रही है—एकदंत गजराज. अब वह इस अंचल की लोककथाओं का जीवंत पात्र बन चुके हैं. उनके एक ही दाँत होने के पीछे भी एक लोक... Read more
बसंत में ‘तीन’ पर एक दृष्टि
अमित श्रीवास्तव के हाल ही में आए उपन्यास ‘तीन’ को पढ़ते हुए आप अतीत का स्मरण ही नहीं करते वरन् भविष्य में भी झांक सकते हैं. समय तो हमेशा आगे बढ़ता ही रहता है लेकिन मानवता की चुनौ... Read more
भाबर नि जौंला…
मौसमी परिवर्तनों के चलते आई कठिनाइयां रहीं हों या रोजगार, काम-धाम की तलाश, शीत ऋतु शुरू होते ही परंपरागत पर्वतीय समाजों में हिमालय के वाशिंदे फुटहिल्स पर फैले भाबर में सदियों से ऋतु-प्रवासन... Read more
क्वी त् बात होलि
सुदि त क्वी नि देखदु कै सणी… विशुद्ध रूप से चेष्टा-भाव पर आधारित इस गीत में युवती की चेष्टाओं को देखकर युवक के हृदय में जो आकर्षण-विक्षोभ उत्पन्न होता है, उसका निहायत सजीव चित्रण हुआ ह... Read more
फूलदेई के बहाने डांड्यौं कांठ्यूं का मुलुक…
गढ़रत्न नरेंद्र सिंह नेगी ऐसे चितेरे कवि-गायक हैं जो अपने गीतों में लोकजीवन, लोक-संस्कृति के साथ कुदरत का समूचा चित्र उकेरते हैं. जहां एकओर उनके गीतों में लोक तत्त्वों का गहरा समावेश रहता है... Read more
सिनेमा का शौक और शब्दभेदी वरदान
उस समय फिल्मों का इतना क्रेज हुआ करता था कि लड़के खुद को रोक नहीं पाते थे. किसी भी छत पर वीसीआर पर एक ही रात में तीन-तीन फिल्में दिखाई जातीं. मार्च में परीक्षाएं निबटने के बाद लड़के बिंदास ह... Read more
अविस्मरणीय कथाकार शेखर जोशी को श्रद्धांजलि
बीती 30 सितंबर को प्रतुल जोशी जी से मुलाकात हुई. वे कथाकार पिता के प्रतिनिधि के तौर पर द्वितीय विद्यासागर नौटियाल सम्मान प्राप्त करने देहरादून आए हुए थे. पिता की नासाज हालत को लेकर वे खासे उ... Read more
पुस्तक समीक्षा – भंवर: एक प्रेम कहानी
भंवर: एक प्रेम कहानी- अनिल रतूड़ी का हाल ही में प्रकाशित उपन्यास है. उपन्यास में लेखक ने लोक-जीवन से भरपूर जितने चित्र और चरित्र उकेरे हैं, कुदरत के चित्र उससे कहीं कमतर नहीं दिखते. लेखक को... Read more
चारधाम यात्रा का मुख्य द्वार होने के चलते ऋषिकेश को ट्रांसपोर्ट नगरी भी कहा जाता है. आज के सूचना प्रौद्योगिकी के युग में कैब सहज ही उपलब्ध हो जाती है. ये उबेर, ओला का युग है. ट्रैवल एजेंसियो... Read more


























