कानिया के प्रेम में दीवानी सुबनी : लोककथा
रात ढलते ही जब सुबनी और लाली दोनों बहनें पानी भरने के लिए गाँव के पनघट पर पहुँचीं, तो अचानक सुबनी की नज़र एक ऐसे व्यक्ति पर पड़ी जो बांझ के पेड़ के नीचे, खुले आसमान में अपनी लोईया (ऊन की शॉल... Read more
कर्ज पर युधिष्ठिर का जवाब : लोककथा
बड़ी पुरानी बात है. पांडु राजा के पाँच पुत्र थे, पांडव और धृतराष्ट्र के सौ पुत्र थे, कौरव. राज्य आधा-आधा बँटा था, पर कौरवों में सबसे बड़ा दुर्योधन बड़ा कपटी और हठी था. उसने छल से पांडवों को... Read more
शकटाल का प्रतिशोध
पिछली कथा में हमने देखा कि कैसे योगनंद सत्ता तक पहुँचा, शकटाल ने अपने सौ पुत्र खो दिए, और वररुचि राज्य के प्रधान मंत्री बने. पर सत्ता का स्थिर रहना ही अंत नहीं होता, वास्तविक परीक्षा तब शुरू... Read more
भाषाओं का इतिहास हमेशा रोचक रहा है. दुनिया की कई भाषाओं में ऐसे शब्द मिलते हैं जो एक दूसरे से मिलते जुलते दिखाई देते हैं. कभी यह समानता अलग अलग समाजों के संपर्क से बनती है, कभी किसी एक... Read more
आज है उत्तराखंड का लोकपर्व ‘फूलदेई’
उत्तराखंड को केवल ‘देवभूमि’ ही नहीं, बल्कि उत्सवों की भूमि कहना भी बिल्कुल सटीक होगा. यहाँ साल भर पर्वों, मेलों और त्यौहारों की अनोखी रौनक देखने को मिलती है.... Read more
अनूठी शान है कुमाऊनी महिला होली की
यूं तो होली पूरे देश में मनाए जाने वाला एक उमंग पर्व है परन्तु अलग अलग अंचलों में इस पर्व की विविधता देखने को मिलती है. उत्तराखंड के कुमाऊं अंचल में होली का विशिष्ट स्वरूप दृष्टिगोचर होता है... Read more
एक गुरु की मूर्खता
केरल की मिट्टी में कुछ तो है, या शायद वहाँ की हवा में, जो मलयालियों के स्वभाव में हल्की-सी बेबाकी, तंज और व्यंग्य भर देती है. इसलिए इसमें कोई आश्चर्य नहीं कि मध्यकालीन केरल के कई प्रसिद्ध लो... Read more
प्रेम में ‘अपर्णा’ होना
हिमालय की गोद में राजा हिमवान और रानी मेना के यहाँ जन्मी पार्वती बचपन से ही शिव को अपने आराध्य के रूप में देखती थीं. शिव कैलाश के योगी थे, भस्म से विभूषित, जटाओं में गंगा धारण किए और संसारिक... Read more
घमंडी पिता और उसकी सीख
हिमालय की ऊँची पहाड़ियों के बीच एक छोटा-सा गाँव था. पत्थर के घर, देवदार के जंगल और पास ही बहती ठंडी नदी; यही वहाँ की पहचान थी. उसी गाँव में एक किसान रहता था. मेहनती था, लेकिन उससे भी ज़्यादा... Read more
उत्तराखंड के पेड़-पौधे: लोकज्ञान और औषधीय सत्य
कहा जाता है कि एक बार हिमालय में एक वैद्य गुरु अपने शिष्यों की शिक्षा पूरी होने पर अंतिम परीक्षा ले रहे थे. गुरु ने सब शिष्यों से कहा “हिमालय से ऐसा कोई पेड़ या पौधा खोजकर लाओ जो किसी काम का... Read more
























