नगरूघाट मेला : यहाँ लगती है “मितज्यू” की अनूठी डोर
उत्तराखंड की मिट्टी में लोक परंपराओं की खुशबू रची-बसी है. हर पर्व, हर मेला यहाँ सिर्फ उत्सव नहीं होता, बल्कि सामाजिक एकता और मानवता का प्रतीक भी बन जाता है. ऐसी ही एक अद्भुत परंपरा का गवाह ह... Read more
उत्तराखंड का कुमाऊं अंचल अपनी अनूठी और प्राचीन सांस्कृतिक परंपराओं के लिए जाना जाता है. समय के साथ यहां के सामाजिक ताने-बाने और रीति-रिवाजों में कई बड़े बदलाव आए हैं. कुमाऊं के वैवाहिक इतिहा... Read more
उत्तराखंड राज्य में अल्मोड़ा, बागेश्वर, चम्पावत और पिथौरागढ़ जिलों में रहने वाले लोग कुमाऊनी कहलाते हैं. नैनीताल जिले के पर्वतीय हिस्सों में रहने वाले लोग भी इसी कुमाऊनी समाज का हिस्सा माने... Read more
कुमाऊं में प्रचलित महाभारत कथाओं पर शोध अलग-अलग समय और हिस्सों में हुआ है. अब तक डॉ. रामसिंह, पद्मादत्त पन्त और स्मृति शान्ति साह द्वारा कुमाऊं में प्रचलित महाभारत कथाओं पर काम किया गया है.... Read more
जनपद पिथौरागढ़ के मेले
लोक जीवन में मेलों का एक अलग स्थान है. मेले, कष्टसाध्य जीवन जीते पर्वतीय लोगों को अपने प्रियजनों, नाते-रिश्तेदारों और मित्रों आदि से मिलने का सुअवसर होते हैं. मेले, वर्षभर अपने खेतों और जंगल... Read more
पहाड़ की शादियां
उत्तराखंड के कुमाऊं क्षेत्र की शादियां और वहां के रीति-रिवाज अपने आप में बहुत अनोखे हैं. समय के साथ शादियों के तौर-तरीकों में काफी बदलाव आया है. चलिए आज बात करते हैं कुमाऊं की पुरानी ‘... Read more
गढ़वाल की पांडव लीला
गढ़वाल की एक विस्तृत लोक धार्मिक परंपरा का नाम है पांडव नृत्य. पांडव नृत्य ही ‘पांडव लीला’ भी कहा जाता है. पांडव लीला गढ़वाल की एक विस्तृत अनुष्ठानिक परंपरा है, जो कई दिनों तक चलती है. उत्तर... Read more
हरिद्वार के 5 आदिकालीन और रहस्यमयी शिव मंदिर
धर्मनगरी हरिद्वार को सिर्फ गंगा मैया के घाटों के लिए ही नहीं, बल्कि यहाँ के प्राचीन और चमत्कारी शिव मंदिरों के लिए भी जाना जाता है. कनखल के राजा दक्ष और माता सती की पौराणिक कहानियों से घिरे... Read more
वीर गढ़ू सुम्याल और सती सरू कुमैण की गाथा
कहानी शुरू होती है बहुत पुराने जमाने से, जब रुद्र राउत मल्ली खिमसारी का थोकदार था और उसका चचेरा भाई ऊदी राउत तल्ली खिमसारी का. दोनों रुद्रपुर के पास रहते थे. एक दिन ऊदी अपने बड़े भाई रुद्र स... Read more
वैश्वीकरण के युग में अस्तित्व खोते पश्चिमी रामगंगा घाटी के परम्परागत आभूषण
रामगंगा घाटी की स्थानीय बोली में आभूषणों को ‘हतकान’ कहा जाता है, इससे ज्ञात होता है कि प्राचीन समय में यहाँ के लोग कान और हाथों के आभूषणों से ही परिचित थे। इन दोनों अंगों को अलंकृत करने वाले... Read more















