पिछली कड़ी : सोशियल इकोनॉमी ऑफ हिमालय : हिमालय की सामाजिक अर्थव्यवस्था का आरंभिक अकादमिक अध्ययन कुमाऊं में जाति व भूमि के संबंध का विश्लेषण करने वाले अनुसन्धान के जनक रहे राम दत्त सनवाल (192... Read more
हरेला: प्रकृति, परंपरा और विज्ञान का अद्भुत संगम
हर साल पर्यावरण संरक्षण के नाम पर लाखों पौधे लगाए जाते हैं. तस्वीरें खिंचती हैं, अभियान चलते हैं और कुछ दिनों तक इसकी खूब चर्चा भी होती है. लेकिन कुछ महीनों बाद अगर उन्हीं जगहों पर जाकर... Read more
हरेले के रंग में पहाड़ : फोटो निबन्ध
आज उत्तराखंड का लोक पर्व हरेला है जो हरियाली और प्रकृति से जुड़ा है. हरेले का रंग और उत्साह उत्तराखंड के कुमाऊँ की बौरारो (सोमेश्वर) घाटी और लोध में हरेला आने से एक माह पूर्व तब से ही शुरू ह... Read more
अब हल्द्वानी में पहाड़ी उत्पादों के सबसे विश्वसनीय ब्रांड ‘मुनस्यारी हाउस’ की शुरुआत
आपको मुनस्यारी की दुर्लभ राजमा कि तलाश है या फिर कुमाऊं-गढ़वाल के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में पैदा होने वाली जड़ी-बूटियों या मसालों की, या फिर विभिन्न प्रजाति के चावल या दालों की, आपकी मंजिल... Read more
खड़कमाफी के जंगलों और आबादी के बीच पिछले लगभग एक दशक से एक परिचित छाया विचरती रही है—एकदंत गजराज. अब वह इस अंचल की लोककथाओं का जीवंत पात्र बन चुके हैं. उनके एक ही दाँत होने के पीछे भी एक लोक... Read more
हाल ही में मेरी उत्तराखंड यात्रा, हरिद्वार, मसूरी, देहरादून और टिहरी, ने मुझे यह गहरा एहसास कराया कि यह भू-दृश्य अपनी पारिस्थितिक वहन क्षमता (Ecological Carrying Capacity)... Read more
उत्तराखण्ड की पर्वतीय संस्कृति में प्रकृति और मनुष्य के बीच गहरा और आत्मीय संबंध दिखाई देता है. यहां का लोकजीवन सदियों से स्थानीय प्राकृतिक संसाधनों पर आधारित रहा है. इन्हीं संसाधनों में रिं... Read more
कानिया के प्रेम में दीवानी सुबनी : लोककथा
रात ढलते ही जब सुबनी और लाली दोनों बहनें पानी भरने के लिए गाँव के पनघट पर पहुँचीं, तो अचानक सुबनी की नज़र एक ऐसे व्यक्ति पर पड़ी जो बांझ के पेड़ के नीचे, खुले आसमान में अपनी लोईया (ऊन की शॉल... Read more
चीड़ की छाल को कलाकृतियों का रूप दे रहा एक कलाकार
चीड़ के जंगल उत्तराखण्ड के कुमाऊं व गढ़वाल क्षेत्र में 900 से 1500 मीटर की ऊंचाई पर बहुतायत में पाये जाते हैं. चीड़ के तने व शाखाओं को मुख्य रूप से इमारती ... Read more
मेरी यादों का पहाड़ : एक बहुआयामी किताब
2013 सन् में नेशनल बुक ट्रस्ट ने देवेन्द्र मेवाड़ी की किताब ‘मेरी यादों का पहाड़’ छापकर सराहनीय कार्य किया है. 140 रुपये मुनासिब दामों की यह किताब मेवाड़ी ने खुद के बचप... Read more


























