पहाड़ की पुकार जो खींच ले गई मुझे
नौ साल बाद पिथौरागढ़ जा रहा था. पिछले कुछ वर्षों में जब भी छुट्टी मिली, बेटी के पास अमेरिका चला गया. उसके ग्रेजुएशन की पढ़ाई के दिनों में भी और उसके बाद तब भी जबकि उसने काम करना शुरू कि... Read more
‘मनिला डांडे की देवी मां आज बहुत उदास है
देवी मां उदास है परन्तु परलोक गया पुत्र आज भी यादों में आकर उसको हिम्मत दिला रहा है. मनिला डांडे की देवी को ही नहीं हमारे पूरे समाज को कि – लस्का कमर बांधा, हिम्मत का साथा,फिर... Read more
सोशियल इकोनॉमी ऑफ हिमालय : हिमालय की सामाजिक अर्थव्यवस्था का आरंभिक अकादमिक अध्ययन
पिछली कड़ी : उत्तराखंड राज्य की अवधारणा किसी एक नेता या आंदोलन से नहीं बनी हिमालय की सामाजिक अर्थव्यवस्था का आरंभिक अकादमिक विश्लेषण श्याम दत्त पंत ने किया. उन्होंने ब्रिटिश काल में उच्च शिक्... Read more
मानव और प्रकृति का संबंध अत्यंत प्राचीन, गहरा और अविभाज्य है. प्रकृति तथा वायुमंडल से मिलकर बने पर्यावरण के विभिन्न तत्व—जैसे जल, वायु, मिट्टी, वनस्पति, खनिज और जीव-... Read more
दूधातोली की मुरलीकोठा चोटी (3000 मीटर) के चारों ओर के परिदृश्य को समझाते हुए कुलदीप ने पूरे रोमांच के साथ नरेन्द्र सिंह नेगी का यह गीत गाया. इस पद-यात्रा में नयार की मातृ धाराओं के प्रवाह के... Read more
कर्ज पर युधिष्ठिर का जवाब : लोककथा
बड़ी पुरानी बात है. पांडु राजा के पाँच पुत्र थे, पांडव और धृतराष्ट्र के सौ पुत्र थे, कौरव. राज्य आधा-आधा बँटा था, पर कौरवों में सबसे बड़ा दुर्योधन बड़ा कपटी और हठी था. उसने छल से पांडवों को... Read more
हमारे इलाक़े में लंगड़ा आम अमूमन इन्हीं दिनों यानी जून के तीसरे-चौथे हफ़्ते में सलीके से पकना शुरू होता है. पके हुए इस दिव्य आम का स्वाद जीभ पर नहीं पेट के सबसे चोर हिस्से पर कब्ज़ा जमाता है... Read more
उत्तराखंड की राजनीति के एक युग का अंत हो गया है. प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) भुवन चंद्र खंडूरी (Bhuvan Chandra Khanduri) का... Read more
बचपन की यादों को जीवंत करती किताब
‘आ, यहां आ. अपनी ईजा (मां) से आखिरी बार मिल ले. मुझसे बचन ले गई, देबी जब तक पढ़ना चाहेगा, पढ़ाते रहना.’ उन्होंने किनारे से कफन हटाकर मेरा हाथ भीतर डाला और बोले ‘अपनी... Read more
अहंकार ही है हमारा सबसे चालाक दुश्मन
जीवन में हमारे जितने भी शत्रु हैं, उनमें सबसे खतरनाक वह है जो दिखता नहीं. जो सामने आकर वार नहीं करता. जो इतनी चालाकी से काम करता है कि हम उसे पहचान ही नहीं पाते. और जब तक पहचानते हैं,... Read more


























