हिमालय के गुमनाम नायक की कहानी
इस तस्वीर में आपको दिख रहे हैं “पंडित नैन सिंह रावत” — 19वीं सदी के उन महान भारतीय खोजकर्ताओं में से एक, जिन्हें “पंडित ऑफ पंडित्स” कहा जाता है. क्या आप... Read more
भारतीय परम्परा और धरती मां
हमारी भारतीय परंपरा में धरती को हमेशा से ही मां कह कर पुकारा गया है. ‘माता भूमिः पुत्रो ऽहम् पृथिव्याः’ यानी धरती मेरी मां और मैं उसका पुत्र हूं. भारतीय साहित्य व लोक मान्यताओं में... Read more
एटकिंसन : पहाड़ आधारित प्रशासन का निर्माता
तत्कालीन नार्थ वेस्टर्न प्रोविनेंस यानी उत्तर प्रदेश के जिस ब्रिटिश अधिकारी ने उन्नीसवीं शताब्दी के उत्तरार्ध में सेवारत रहते हुए पहाड़ी क्षेत्रों के लिए विशेष व्यवस्था और भिन्न स्वरूप का प्... Read more
बीमारी का बहम और इकदँडेश्वर महाराज का ज्ञान
संसार मिथ्या और जीवन भ्रम है, मनुष्य का मानना है वह जीवों में श्रेष्ठ व बुद्धिमान है. लेकिन खुद असंख्य मायावी बंधनों से जकड़ा हुआ छटपटाता रहता है, छुटकारा पाना चाहता है. फिर भी इन... Read more
शकटाल का प्रतिशोध
पिछली कथा में हमने देखा कि कैसे योगनंद सत्ता तक पहुँचा, शकटाल ने अपने सौ पुत्र खो दिए, और वररुचि राज्य के प्रधान मंत्री बने. पर सत्ता का स्थिर रहना ही अंत नहीं होता, वास्तविक परीक्षा तब शुरू... Read more
उत्तराखंड के आय व्यय लेखे 2026-27 को समझते हुए यह आशंका उभरती है की क्या यह पुलिंदा पहाड़ की खेती, छोटे उद्योग व स्थानीय आर्थिकी को संरचनात्मक आधार प्रदान करता है या फिर मात्र घोषणाओं क... Read more
भाषाओं का इतिहास हमेशा रोचक रहा है. दुनिया की कई भाषाओं में ऐसे शब्द मिलते हैं जो एक दूसरे से मिलते जुलते दिखाई देते हैं. कभी यह समानता अलग अलग समाजों के संपर्क से बनती है, कभी किसी एक... Read more
आज है उत्तराखंड का लोकपर्व ‘फूलदेई’
उत्तराखंड को केवल ‘देवभूमि’ ही नहीं, बल्कि उत्सवों की भूमि कहना भी बिल्कुल सटीक होगा. यहाँ साल भर पर्वों, मेलों और त्यौहारों की अनोखी रौनक देखने को मिलती है.... Read more
‘यौ डाना कौ पारा, देख्यूंछ न्यारा-न्यारा’ दीवान सिंह कनवाल की आवाज़ में ये गीत पहली कुमाऊनी फ़िल्म ‘मेघा आ’ का है. ‘मेघा आ’ फ़िल्म के गीत आज भी एक पीढ़ी को मुंहजबानी याद हैं तो इसक... Read more
हिमालय को समझे बिना उसे शासित नहीं किया जा सकता
कुमाऊं-गढ़वाल हिमालयी क्षेत्र के लिए भिन्न प्रशासन, विशेष नीति या मैदानी भागों से भिन्न व्यवस्था को प्राथमिकता देने वाले कई ब्रिटिश प्रशासक रहे जो औपनिवेशिक शासन की समय अवधि में पहाड़ में तै... Read more


























