सी. डब्लू. मरफी की किताब ‘अ गाइड टू नैनीताल एंड कुमाऊँ’ (1906) से आप अनेक दिलचस्प विवरण पढ़ चुके हैं. आज इस किताब से पढ़िए अल्मोड़ा और नैनीताल के बीच आने-जाने की व्यवस्था के बारे में कुछ रोच... Read more
केदारनाद की टोकरी से हरेले का गीत
पिछले कुछ सालों से उत्तराखण्ड के युवाओं द्वारा लोक संगीत को नए कलेवर में पेश करने का चलन देखने में आया है. इन कोशिशों में गाने को भौंडा बनाने के बजाय उनकी पहाड़ी आत्मा को बचाये-बनाये रखने के... Read more
एडविन फीलिक्स टॉमस एटकिंसन आयरलैंड की टिपरी काउंटी में 6 सितम्बर 1840 को जन्मे थे. कीट-पतंगों का अध्ययन यानी एंटोमोलॉजी उनका विषय रहा और वे इसी के विशेषज्ञ भी थे. ग्रामीण परिवेश में जन्मे एट... Read more
उत्तराखण्ड के जाने-माने लोकगायक नरेन्द्र सिंह नेगी को संगीत नाटक अकादमी द्वारा पुरस्कृत करने के लिए चुना गया है. उत्तराखण्ड में संगीत के क्षेत्र में साल 2018 के अकादमी पुरस्कार नरेन्द्र सिंह... Read more
आज सरकार, समाज सभी हरेला को केवल पर्यावरण से जोड़ने की जुगत में लगे हैं. इसमें सभी के अपने फायदे हैं. हरेला पर्व को केवल पर्यावरण के साथ जोड़ने का एक गंभीर परिणाम यह होगा कि हरेला कुछ वर्षों म... Read more
खुद तो थे कंगाल गुरुजी कर गए मालामाल गुरुजी !
अभी पन्द्रह दिवस पूर्व ही लघु अमावस्या बीती है. इसे चेला अमावस भी कहते हैं. आज गुरु पूर्णिमा का पावन दिन आया है. आज के दिन उन सभी आत्माओं को मन-वचन से श्रद्धा सुमन अर्पित करने का अवसर आया है... Read more
रैमजे ने शुरु कराई कुमाऊं में आलू की खेती
आलू-पालक, आलू-जीरा, आलू-टमाटर, आलू-मटर, दमा आलू और भी अनेकों ऐसी सब्ज़ियां हैं जो बिना आलू के अधूरी हैं. आज आलू के बगैर हम अपने किसी खाने की कल्पना नहीं कर सकते. अगर दुनिया में आलू ना होता त... Read more
कहते हैं बुज़ुर्गों की डांट-फटकार बच्चों के लिए जीवन का सबब होती थी.मां की डांट को बच्चे नज़रअंदाज़ कर जाते थे लेकिन आमा-बूबू की डांट सुनते ही सन्न रह जाते थे. समय काफ़ी बदल चुका है. अब न तो... Read more
बरसों पहले कोकूकोट में कोकू रावत नाम का एक राजा हुआ करता था. राजा कोकू की सात रानियां थी लेकिन कोई पुत्र न था. इसलिए राजा ने एक और विवाह कुंजावती नाम की अद्वितीय सुंदर लड़की से किया. कोकू रा... Read more
पौड़ी का कण्डोलिया ठाकुर मंदिर
माना जाता है कि चंद साम्राज्य की राजधानी चम्पावत से डुंगरियाल-नेगी जातियों से सम्बन्ध रखने वाले कुछ परिवार अपना मूल स्थान छोड़ कर पौड़ी में आ कर बसे थे. जैसी कि परम्परा थी इस तरह स्थान बदलने व... Read more


























