देवदार: उत्तराखण्ड के जंगलों का राजा
उत्तराखंड के पहाड़ वैसे तो जड़ी-बूटी और पेड़ों से पटे हुए हैं परंतु देवदार के पेड़ों की शान ही निराली है. अगर आप देवदार के जंगलों में पहुंच जाएंगे तो यह पेड़ शीतलता और सुगंध से आपका स्वागत क... Read more
है दुनिया उसी की, ज़माना उसी का
(पोस्ट को रुचिता तिवारी की आवाज़ में सुनने के लिए प्लेयर पर क्लिक करें) मेलोडेलिशियस-12 ये ऑल इंडिया रेडियो नहीं है. ये ज़ेहन की आवाज़ है. काउंट डाउन नहीं है ये कोई. हारमोनियम की ‘कीज़... Read more
साल 2006 में मैंने पत्रकारिता की शुरुआत की थी. शायद यही वह दौर था जब लोककलाकार नरेन्द्र सिंह नेगी ने अपने एक गीत से जनविरोधी तिवारी सरकार की पोल खोल दी. उनका गीत लोगों के मन में ऐसा रमा कि त... Read more
खलंगा युद्ध और गोरखा शौर्य
‘खलंगा’ नेपाली भाषा का शब्द है, जिसका अर्थ छावनी या कैंटोनमेंट होता है. अंग्रेज इतिहासकारों ने अपनी भाषिक समझ के हिसाब से इसे किला कहा, जबकि यह एक सुदृढ़ किला नहीं था. युद्ध के ठ... Read more
कुमाऊं के पहाड़ों में ऐसे लोग हैं जिनके पंख होते हैं और जो उड़ भी सकते हैं : बदायूंनी
रुद्रचंद, चंद शासकों में सबसे शक्तिशाली शासक के रूप में जाना जाता है. रुद्रचंद के शासन काल में ही चंद शासकों ने डोटी के शासकों से सीराकोट जीता था. रुद्रचंद अल्मोड़ा की गद्दी पर 1565 ई. में बै... Read more
उत्तराखंड के कुमाऊं मंडल का जब भी इतिहास लिखा गया है तब एक सामान्य धारणा यह बनाने की रही है कि गोरखाओं की तुलना में ब्रिटिश साम्राज्य का काल में यहां के स्थानीय लोगों का जीवन शांतिपूर्ण और अ... Read more
वाह-वाह,वाह जी वाह,हमने सरकार क्या चुनी,चमत्कार चुने हैं. पहले लोग कहते थे कि सरकार के पास कोई जादू की छड़ी थोड़े है,जो पल भर में समस्याओं को हल कर दे. लेकिन उत्तराखंड में तो लगता है,सरकार व... Read more
मसूरी का इतिहास
उत्तराखण्ड के गढ़वाल मण्डल के पहाड़ी कस्बे मसूरी को पहाड़ों की राजधानी भी कहा जाता है. मसूरी उत्तराखण्ड का सबसे ज्यादा लोकप्रिय पर्यटन स्थल है, यहाँ हर साल सबसे ज्यादा सैलानी आया करते हैं. र... Read more
भीषण पेयजल संकट के कगार पर भारत
हिंदू, मुस्लिम, सिक्ख, ईसाई और भी न जाने कितने ही धर्म के लोग ख़तरे की दहलीज़ पर खड़े हैं. यह ख़तरा धार्मिक नही बल्कि स्वजनित है. यह ख़तरा पानी का है. पीने के साफ़ पानी की अनुपलब्धता ने भारत... Read more
पहाड़ के गांवों में श्यूं-बाघ के किस्से
श्यूं-बाघ? द ऽ, श्यूं-बाघों के तो किस्से ही किस्से ठैरे मेरे गांव में. मुझे जैंतुवा ने कई बार रात में जंगल से आती ‘छां’ फाड़ने की गज्यांठि की जैसी घुर्र, घुर्र, घुर्र की आवाज सुना कर बताया,... Read more


























