4G माँ के ख़त 6G बच्चे के नाम – 45 (Column by Gayatree arya 45) पिछली किस्त का लिंक: अपने मातृत्व और कृतित्व के बीच में पिसती हूं मैं हर बार तुम्हारा किसी न किसी कारण से रोना या च... Read more
सुबह जागे तो बाहर का नजारा शांत था. सर्पाकार कुट्टी यांग्ती नदी के सामने सूरज की किरणों से सुनहरी आभा लिए धवल हिम शिखर लुभा रहे थे. ये अन्नपूर्णा व आपी-नाम्फा के शिखर थे. टैंट पैक करने के सा... Read more
1962 में 10 अगस्त के दिन अल्मोड़ा जिले के पास द्वाराहाट कस्बे में पड़ने वाले गांव पान बड़ैती में एक बच्चे का जन्म होता है. कौन जानता था कि हरीश पांडे और रेवा पांडे के घर में जन्म लेने वाले इस... Read more
‘गढ़केसरी’ अनुसूया प्रसाद बहुगुणा का जन्मदिन है आज
रूद्रप्रयाग जिला मुख्यालय से करीब 32 किमी की दूरी पर एक गांव है ककड़ाखाल. साल 1921 में जब कुमाऊं के बागेश्वर जिले में कुली बेगार को खत्म करने के लिए आन्दोलन जारी था तब इसी गांव से उस समय के ब... Read more
अब दिखावे का ही रह गया है भारत-तिब्बत व्यापार
नाभीढांग की सुबह खुशनुमा था. चाय पीकर हमने वापसी की राह पकड़ी. कालापानी पहुंचने पर पता चला कि आगे कहीं गर्म पानी का स्रोत है. पुल पार कुछ दूर गए ही थे कि एक जगह पर नजर पड़ी, ‘सल्फ... Read more
नानकसागर डैम पार करने में बाधाएँ और खतरे
पिछले अंक में हमने बात की थी नानकमत्ता में नानकसागर डैम के पार स्थित गॉंवों की बदहाल स्थिति की. बेशक उन गॉंवों की स्थिति दशकों बाद भी बहुत अच्छी नहीं है लेकिन उन समस्याओं में भी एक सबसे बड़ी... Read more
मध्य हिमालय की जंगलों में मिलने वाली वनस्पति स्वस्थ बनाये रखने, निरोग रहने व दीर्घायु प्रदान करने के लिए गुणकारी मानी गईं. इन वनस्पतियों के एकल प्रयोग या कइयों के साथ मेल... Read more
‘कुमाऊं केसरी’ बद्रीदत्त पाण्डे का जन्मदिन है आज
लगभग चालीस सालों से चले आ रहे अल्मोड़ा अखबार ने 1913 के बाद ही धार पकड़ी. अल्मोड़ा अख़बार ने जब तक स्थानीय मुद्दों पर अपनी यह धार दिखाई तब तक प्रशासन चुप रहा. लेकिन बद्रीदत्त पाण्डे के सम्पा... Read more
अरे! तुम तो एक हफ्ते में निबटा देने वाले ठैरे ‘वैलन्टाइन डे’ का जश्न, हमारे टैम पर तो सालों भी लग जाने वाले हुए ‘वैलेन्टाइन डे’ के इन्तजार में. किसम-किसम की सेरेमनी और रिचुवल्स होने वाले हु... Read more
साथियों की त्योरियां चढ़ने पर पंकज मुस्करा दिया. उसने सफाई दी, “अरे! कोर्स में यही सब सिखाया जाता है… क्या पता कब क्या मुसीबत आ जाए… इसलिए यह सब जरूरी होता है… वैसे भ... Read more


























