फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ की कहानी उन्हीं की जुबानी
बीसवीं सदी में उर्दू के सबसे बड़े शायरों में थे फ़ैज़ अहमद ‘फ़ैज़’ (Faiz Ahmad Faiz). पूरी ज़िंदगी जनधर्मिता और रूमानियत से भरपूर शायरी करने वाले फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ की सबसे मशहूर नज़्म... Read more
अल्मोड़ा के समीप एकांत सिन्तोला में रहने वाले एक वृद्ध एंग्लो-इन्डियन जोड़े को परिवेश बनाकर लिखी गयी शैलेश मटियानी (Shailesh Matiyani) की कहानी ‘मिसेज ग्रीनवुड’ मानवीय संबंधों, एका... Read more
वीरेन डंगवाल का स्मारक बनेगा बरेली में
साहित्य अकादेमी सम्मान से पुरुस्कृत विख्यात हिन्दी कवि वीरेन डंगवाल (Viren Dangwal) की स्मृति में शीघ्र ही बरेली में एक स्मारक निर्मित किया जाएगा. इस आशय की सूचना देते हुए वीरेन डंगवाल के बड़... Read more
हिन्दी के मूर्धन्य कथाकार-उपन्यासकार शैलेश मटियानी (Shailesh Matiyani) अल्मोड़ा जिले के बाड़ेछीना में 14 अक्टूबर 1931 को जन्मे थे. सतत संघर्ष से भरा उनका प्रेरक जीवन भैंसियाछाना, अल्मोड़ा, इल... Read more
गाँव में आवाजें
साहित्य अकादेमी पुरुस्कार से सम्मानित मंगलेश डबराल (Manglesh Dabral) हमारी भाषा के जाने माने कवि हैं. 16 मई 1948 को उत्तराखंड के गढ़वाल में काफलपानी नामक गाँव में जन्मे मंगलेश के प्रकाशित कव... Read more
यह लेख अटैची के बारे में नहीं है
आज प्रातः समाचार मिला कि एक मित्र की नियुक्ति उप निदेशक के पद पर हो गई है. मित्र की नियुक्ति के इस समाचार से प्रसन्नता होनी चाहिये थी ,पर मुझे आश्चर्य अधिक हुआ. मुझे लगता है कि वो इस पद के अ... Read more
उर्दू से सबसे सफल शायर सब मानते हैं कि उर्दू एक बेहद मीठी ज़बान है. इस भाषा में लिखी गयी कविता भारतीय उपमहाद्वीप की सबसे लोकप्रिय काव्य विधा मानी जा सकती है. पीढ़ियों से लोग देश, काल और परिस्थ... Read more
देना! – नवीन सागर जिसने मेरा घर जलाया उसे इतना बड़ा घर देना कि बाहर निकलने को चले पर निकल न पाये. जिसने मुझे मारा उसे सब देना मृत्यु न देना. जिसने मेरी रोटी छीनी उसे रोटियों के समुद्... Read more
गिर्दा का केदारनाद
विगत कुछ सालों से महानगरों में खप रहे युवाओं के बीच पहाड़ लौटकर कुछ कर गुजरने का एक नया, सकारात्मक चलन देखने में आ रहा है. ये युवा बहुत उम्मीद के साथ पहाड़ लौटते हैं और खुद पहाड़ की उम्मीद बन ज... Read more
किसने आख़िर ऐसा समाज रच डाला है
हमारा समाज -वीरेन डंगवाल यह कौन नहीं चाहेगा उसको मिले प्यार यह कौन नहीं चाहेगा भोजन वस्त्र मिले यह कौन न सोचेगा हो छत सर के ऊपर बीमार पड़ें तो हो इलाज थोड़ा ढब से बेटे-बेटी को मिले ठिकाना द... Read more


























