कथाकार शेखर जोशी की कहानी ‘कोसी का घटवार’
शेखर जोशी का जन्म 10 सितंबर 1932 को उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले के ओलिया गांव में जन्म हुआ. अनेक सम्मानों से नवाजे जा चुके हिन्दी के शीर्षस्थ कहानीकारों में गिने जाने वाले शेखर जोशी के अनेक क... Read more
अविस्मरणीय कथाकार शेखर जोशी को श्रद्धांजलि
बीती 30 सितंबर को प्रतुल जोशी जी से मुलाकात हुई. वे कथाकार पिता के प्रतिनिधि के तौर पर द्वितीय विद्यासागर नौटियाल सम्मान प्राप्त करने देहरादून आए हुए थे. पिता की नासाज हालत को लेकर वे खासे उ... Read more
उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में डोकरानी बामक ग्लेशियर में आज हिमस्खलन हुआ है. इस एवलांच में नेहरू पर्वतारोहण संस्थान (निम) के दो प्रशिक्षकों के हताहत होने की खबर है. एवलांच आने से 28 लोग फंस... Read more
उत्तराखण्ड में पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने सरकार पर निशाना साधा है. उन्होंने मुख्यमंत्री धामी को संबोधित करते हुए कहा है कि जिस वीआईपी के लिए अंकिता पर ‘स्पेशल सर्विसेज’ देने... Read more
सितम्बर 22 को रजिस्ट्रार जनरल ऑफ इण्डिया (आर.जी. आई) के जरिये आये नतीजे जो सांख्यिकी रपट 2020 की न्यादर्श पंजीकरण प्रणाली (एस.आर.एस) पर आधारित रहे, बताते हैं कि, “उत्तराखंड में प्रति ह... Read more
68वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार नई दिल्ली में आयोजित किया गया. कार्यक्रम में भारत के राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू द्वारा पुरस्कार दिये गये. 68वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में उत्तराखंड राज्य को... Read more
मनकोट के भट्ट के डुबके
चूल्हे पर एक नौजवान कायदे से लकड़ी सुलगा रहा है. बीच-बीच में उसका ध्यान कड़ाही से उठने वाले भाप पर भी जा रहा है. यह एक तरह की कला है, मैं इसे दुनिया भर की श्रेष्ठ कला में स्थान देता हूँ. यहा... Read more
अंकिता हत्याकांड की सीबीआई जांच क्यों नहीं?
पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा है कि अंकिता हत्याकांड में बार-बार जिस वीआईपी का नाम आ रहा है उसका खुलासा होना जरूरी है. उन्होंने यह भी कहा कि सरकार चाहे तो घटना की सीबीआई जांच... Read more
उत्तराखंड के अल्मोड़ा की पहचान के कई आयाम हैं, पहाड़ों में बसा ये प्राचीनतम शहर आधुनिकता को अपनाने में भी पीछे नहीं है पर जो चीज अल्मोड़ा को अनूठा बनाती है वो है यहां के लोगों का अपनी संस्कृ... Read more
पेड़-पौधों से बतियाने वाला अद्भुत है ये शख्स
बूढ़े हो चुके अपने जिंदा शरीर के लगभग साठेक किलो वजन को साथ लिए वो हर पल कहीं न कहीं धरती के सीने में चारेक दशक से चौड़ीदार वृक्षों को रोपने में लगे रहते हैं. इसके साथ ही सूख रहे नौलों, धारो... Read more


























