अल्मोड़ा जिंदगी में नमूदार हुए कुछ उन शहरों में रहा जिन्होंने न केवल प्रभावित किया बल्कि अंदर तक हिलाया भी. (Famous Ramlila Tradition of Almora) अल्मोड़ा बिना अभिभूत किए छोड़ता नहीं है. शहर... Read more
थल का बालेश्वर मन्दिर: जगमोहन रौतेला का फोटो निबंध
बेड़ीनाग (पिथौरागढ़) से थल (पिथौरागढ़) को जाते हुए पूर्वी रामगंगा के पुल को पार करते ही थल का बाजार शुरु हो जाता है. मुख्य बाजार की ओर जाते हुए पुल से लगभग 25-30 मीटर की दूरी पर बाईं ओर रामग... Read more
हमारी नियमित लेखिका गीता गैरोला ने आपको अनेक मनभावन कहानियां सुनाई हैं. हाल ही में हमने उनकी मशहूर किताब ‘मल्यो की डार’ के एक अध्याय को हरिद्वार में रहने वाली स्मिता कर्नाटक की आवाज़ में सुन... Read more
उत्तराखंड प्रदेश की राजनीति में महत्वपूर्ण स्थान रखने वाले विधायक बंशीधर भगत जब आते हैं स्टेज पर तो बज उठती है तालियां. उत्तराखंड प्रदेश की राजनीति में अलग पहचान रखने वाले जाना पहचाना चेहरा,... Read more
उत्तराखंड में पंचायत चुनाव शुरू होने को हैं. शनिवार 6 अक्टूबर से 16 अक्टूबर तक तीन चरणों में इन पंचायत चुनावों को तीन चरणों में संपन्न कराया जाना है. (List of 90 Expelled Uttarakhand BJP Wor... Read more
मंडुवा की रोटी भली, सिसुणा को साग
असल में लोकोक्ति है- “मंडुवा की रोटी भली, सिसुणा को साग.” बचपन में सुना ही सुना था. सिसुणा का साग बनता बहुत कम घरों में था. फिर भी, जहां बनता था, चखने को मिल जाता था. लेकिन, सच यह है कि जो स... Read more
महान क्रांतिकारी रास बिहारी बोस देहरादून में 65 रुपये की तनख्वाह पर नौकरी करते थे
भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में रास बिहारी बोस सर्वाधिक समय तक सक्रिय रहने वाले क्रांतिकारी हैं. रास बिहारी बोस से जुड़ी पहली सबसे बड़ी घटना है – हार्डिंग बम काण्ड. हार्डिंग बम क... Read more
कुछ लोग ऐसे होते हैं जो पहाड़ को छोड़कर भी पहाड़ को नहीं भूलते हैं, उन्हीं में से एक है बीके सामंत. 2000 में पहाड़ छोड़कर कामकाज के सिलसिले में मुम्बई चल पड़े बीके सामंत मूल रूप से चंपावत जि... Read more
भूमि की अंदरूनी सतह में स्थित टेक्टोनिक प्लेट्स के हिलने तथा एक दूसरे से टकराने के कारण पहाड़ों और पथरीली चट्टानों में पड़ी दरारों से निकल रहे जल स्रोतों को कहते हैं स्प्रिंग्स. पहाड़ों मे इन... Read more
कुमाऊं अंचल में प्रचलित रामलीला गीत-नाट्य शैली में प्रस्तुत की जाती है. इसमें शास्त्रीयता का पुट मिलता है. कहा जाता है कि रामलीला प्रदर्शन की परंपरा ब्रज से होते हुए कुमाऊं तक पहुंची. रामलील... Read more
























