दो लफ़्ज़ों की है दिल की कहानी
Amore Mio Dove Stai Tu Sto Cercando Sei Solo Mio Amore Mio Dove Stai Tu Sto Cercando Sei Solo Mio दो लफ़्ज़ों की है दिल की कहानी या है मोहब्बत या है जवानी दो लफ़्ज़ों की है दिल की कहानी या ह... Read more
उत्तराखंड का वन आन्दोलन जवान होने लगा था. सुन्दर लाल बहुगुणा की ओजस्वी वक्तृता व लेखन, चंडीप्रसाद भट्ट के अनथक प्रयास, कामरेड गोविंद सिंह रावत के ‘ठेकेदारो सावधान, आ गया है लाल निशान’ के जनव... Read more
मुर्गा, दारू, साड़ी और प्रधानी का चुनाव
पिछली कड़ी – खीम दा की खिमली और प्रधानी का चुनाव लोकमणि और खीम दा को हरदत्त ज्यू की बातें सपने में भी परेशान करने लगी. चुनाव में अब कुछ ही दिन शेष रह गये हैं लेकिन सारा माहौल ये हरदत्त... Read more
ओ गगास! छिन अकास-छिन पताल
अल्मोड़ा से श्रीनगर वाया रानीखेत 22 सितम्बर, 2019 बादलों की गड़गड़ाहट और बारिश की दणमण-दणमण रात भर होती रही. सुबह बारिश तो थम गई, परन्तु कोहरे ने अल्मोड़ा की पहाड़ियों पर कब्जा कर लिया है. क... Read more
दून पुस्तकालय एवं शोध केंद्र देहरादून के तत्वाधान में शनिवार, 5 अक्दूबर, 2019 को होटल इन्द्रलोक में लोकेश ओहरी की पुस्तक ‘द किंगडम कम ‘ का लोकार्पण व चर्चा का एक कार्यक्रम आयोजित... Read more
अल्मोड़ा-बिनसर-कसारदेवी में एक अद्भुत दिन
अंग्रेज़ी में एक कहावत है – “You made my day!” ये कहावत अक्सर तब बोली जाती है जब किसी इंसान की वजह से आपका दिन बन जाए, पर तब क्या बोला जाए जब एक दिन के वजह से ही आपका दिन ब... Read more
ऐपण कला की उम्मीद पिथौरागढ़ की निशा पुनेठा
उत्तराखण्ड की लोकसंस्कृति के विलुप्त हो जाने की आशंका के बीच कई युवा अपने जिद्दी इरादों के साथ इस कुहासे को लगन के साथ हटाते दिखाई देते है. उनके इरादे बताते हैं कि ऐसा मुमकिन नहीं. उनके रहते... Read more
रिटायरमेंट के बाद कमरे में सोएं, यही चाहते हैं बस
बहुत कुछ घुमड़ रहा था उसकी आँखों में. आँखों में देखकर बातें नहीं कर रहा था वो. सामने मेज पर पर एल आई सी का टेबल कैलेण्डर था. उसकी तरफ शायद जून था. जून का एक चित्र था. चित्र में एक परिवार था.... Read more
तुम होगे साधारण ये तो पैदाइशी प्रधान हैं
इन्हें प्रणाम करो ये बड़े महान हैंदंत-कथाओं के उद्गम का पानी रखते हैंपूंजीवादी तन में मन भूदानी रखते हैंइनके जितने भी घर थे सभी आज दुकान हैंइन्हें प्रणाम करो ये बड़े महान हैं उद्घाटन में दिन... Read more
कहां गयी पहाड़ की चुंगी देने की परम्परा
बचपन में चुंगी मिलने अपार आनंद याद आता है. वह जीवन के सबसे सुखद पलों में हुआ करता. हम बच्चे होते थे और घर पर किसी भी बड़े चचेरे-ममेरे भाई या उसके अन्तरंग दोस्त के आने की प्रतीक्षा रहती थी. (... Read more
























