क्या ख्वाब देखे थे, क्या मंजर नुमाया है
महाराष्ट्र में पिछले एक महीने में सामने आए घटनाक्रम पर अगर गौर फरमाएंगे, तो होश उड़ जाएंगे. जनता बेचारी सिर्फ तमाशबीन बनकर हैरान हो रही है. वह करे भी तो क्या. उसके हाथ में कुछ नहीं. एक वोट थ... Read more
सोर की होली के रंग
सोर की होली के रंग ही निराले. एक तरफ अल्मोड़े की बैठि या बैठकी होली के सुर आलाप तो दूसरी ओर गुमदेश-लोहाघाट-चम्पावत -पाटी की थिरकती नाचती हर थाप पे मदमाती खड़ी होली का संगम होता. बैठ कर गाई-ब... Read more
चम्पावत जिले का अधिकांश भाग ‘काली कुमाऊं’ के नाम से जाना जाता है. बिशुंग गांव इसी काली कुमाऊं का एक ऐतिहासिक गांव है. बिशुंग गांव के लोग अपने शौर्य और पराक्रम के लिये दुनिया भर में जाने जाते... Read more
नैनीताल मालरोड में बुरांश खिला है
भला कौन जानता था कि सरोवर नगरी नैनीताल की मालरोड पर एक दिन चिनारों की संगत में बुरांश के दो सुर्ख फूल खिल जाएंगे! लेकिन, वे खिले और एक शाम बाबा एच. एस. राना ने यह अजूबा देखा. फिर उनके मोबाइल... Read more
प्रथम विश्व युद्ध का समय था. गढ़वाल रायफल्स की एक टुकड़ी को अफगानिस्तान में विद्रोह दबाने को भेजा गया इससे पहले ब्रिटिश सेना के 1700 सिपाही मारे गये थे. अब बारी थी गढ़वाल रायफल्स के सैनिकों... Read more
अल्मोड़े में होली के रंग: फोटो निबंध
महिला कल्याण संस्था अल्मोड़ा द्वारा बीते दिनों अल्मोड़े में होली की शुरुआत की गयी. महिला कल्याण संस्था अल्मोड़ा में महिला होल्यारों ने स्वांग, नृत्य, होली गीतों की प्रस्तुति दी जाती है. दो दिन... Read more
अगर संवारना है भाग्य, तो सोचने का ढंग बदलिए
किसी भी क्षण आपके पास सोचने के लिए हमेशा दो विकल्प रहते हैं. पहला यह कि आप जिसके बारे में भी सोच रहे हैं- किसी स्थिति के बारे में, किसी व्यक्ति के बारे में, किसी घटना के बारे में- आप नकारात्... Read more
सरसराना: प्रिय अभिषेक का चुटीला व्यंग्य
“क्या आप अपनी नौकरी से परेशान हैं? क्या आपको अपनी नौकरी में अनेक बाधाओं का सामना करना पड़ता है?(Sarsarana Satire by Priy Abhishek) क्या नौकरी के दौरान आप को यह महसूस होता है कि आप इस नौकरी म... Read more
बीते 18 मार्च को उत्तराखण्ड में सामाजिक चेतना के अग्रदूत ‘बिहारी लालजी’ का निधन हो गया. सर्वोदयी विचारधारा के अग्रणी बिहारी लाल जी ने टिहरी जनपद की बालगंगा घाटी में स्थित प्राचीन... Read more
शेरदा ‘अनपढ़’ की कविता मुर्दाक बयान
जब तलक बैठुल कुनैछी, बट्यावौ- बट्यावौ है गेपराण लै छुटण निदी, उठाऔ- उठाऔ है गे(Sherda Anpadh Poem) जो दिन अपैट बतूँ छी,वी मैं हूँ पैट हौ,जकैं मैं सौरास बतूँ छी,वी म्यैर मैत हौ lमाया का मारगा... Read more
























