कोरोना वायरस हमारे फेफड़ों पर हमला करता है, इसलिए यह तो तय है कि उससे लड़ने के लिए हमें अपने फेफड़ों को ही सबसे ज्यादा ताकतवर बनाना होगा. फेफड़ों को ताकतवर बनाने के लिए हमें अपनी सांस पर काम... Read more
अल्मोड़े के नौला गाँव में जन्मे मथुरादत्त मठपाल ने आज सुबह अंतिम साँस ली. मथुरादत्त मठपाल कुमाऊनी के अभिभावकों में एक थे. मथुरा दत्त मठपाल गढ़वाली और कुमाऊनी बोली के संरक्षण के लिये संघर्षरत... Read more
एक शब्दहीन नदी: हंसा और शंकर के बहाने न जाने कितने पहाड़ियों का सच कहती शैलेश मटियानी की कहानी
‘माई डियर हंसा!’‘ले प्यारी, इस दफा तेरे आर्डर की मुताबिक, खुले पोस्टकार्ड की जगह पर, बंद इंगलैंड लेटर भेज रहा हूँ. हकीकत तो यही हुई कि लवलेटर जरा सेक्रिट किस्म की वस्तु ही... Read more
कोरोना का सत्कार
शीर्षक थोड़ा अटपटा है. धैर्य रखिए, पूरा पढ़ने के बाद समझ में आएगा. ‘अतिथि देवो भव:’ हमारी प्राचीन भारतीय परम्परा का सूत्र-वाक्य है. बचपन से हम सुनते आ रहे हैं कि अतिथि को ईश्वर का स्वरूप मान... Read more
मानव सभ्यता की बसावट के साथ ही अल्मोड़ा का अपना पृथक ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं धार्मिक महत्व रहा है. लाखू उडियार, फलसीमा, कसार देवी जैसे शहर के निकट के ही के प्रागैतिहासिक स्थल मानव सभ्यता की... Read more
पातलीबगड़ के गुलदार
जानवर और इंसान के सम्बंध काफी नजदीकी और नाज़ुक रहे हैं और आज भी हैं, आए दिन लगातार खबरें आती हैं तेंदुए (गुलदार) और इंसानी टकराव की किंतु पिछले दिनो कुछ ऐसा देखा और महसूस किया जो आजकल के समय... Read more
एक उत्सवधर्मी देश जब त्रासदी से गुज़रता है
हमारे देश को उत्सवों का देश कहा जाता है. हमारी उत्सवधर्मिता का लोहा दुनिया मानती है. हमारे जलसों में दुनिया शरीक होती है. हमने अपनी-अपनी कक्षाओं में होली पर निबंध लिखे. दीवाली पर भाषण दिए. ह... Read more
किसी भाषा को कैसे बचाया जा सकता है? यह एक ऐसा सवाल है जिसके बड़े लम्बे चौड़े उत्तर दिये सकते हैं, कविता की जा सकती है. गोष्ठी की जा सकती है. सांस्कृतिक कार्यक्रम किये जा सकते हैं, उसके व्याक... Read more
दारमा, व्यास और चौदास का अलौकिक सौंदर्य
एटकिंसन ने 1866 में अपने ग्रन्थ ‘हिमालयन गज़ेटियर’के भाग तीन में “भोटिया महाल” में विस्तार से दारमा परगने का वर्णन किया है. स्ट्रेची और ट्रेल ने भी अपने यात्रा विवरण... Read more
कोविड ने दिया मुझे जिंदगी का एक नया नजरिया
जीवन हमेशा इस क्षण में घटित होता है, इसलिए सबसे बड़ी बात यही मायने रखती है कि हम किसी क्षण में क्या कर रहे होते हैं. मैं एक अप्रैल को जब दिल्ली आया था, तो दिमाग में कई तरह के अधूरे काम कुलबु... Read more
























