अल्मोड़ा से छत्तीस किलोमीटर दूर पूर्व उत्तर दिशा में देवदार के घने पेड़ों की घाटी में एक सौ चौबीस छोटे बड़े मंदिरों का समूह जागेश्वर है. यहाँ देवदारु के पेड़ हैं इसलिए यह ‘दारूकावन... Read more
स्टीफन हॉकिंग को गए आज तीन साल हो गए हैं
उनकी खास तरह की व्हीलचेयर, बीमारी की वजह से विकृत हो गया, एक तरफ को मुड़ा हुआ चेहरा, मोटे चश्मे के पीछे से झांकती बेबाक आंखें और टेढ़ी-मेढ़ी लम्बी उँगलियां मिल कर आम जन के अचेतन में एक अकल्प... Read more
ताकि समझ आ सकें सृष्टि के सारे रहस्य
वैदिक काल में बड़े-बड़े ऋषि-मुनि, लेखक, ज्ञानी और तपस्वी हुए, जिन्होंने एक से बढ़कर एक तरीके से साधना की और अलग-अलग विद्याओं में निपुणता प्राप्त की. रामायण और महाभारत में हमें एक से बढ़कर एक... Read more
बसंत के पुजारी पहाड़ी बच्चों का आस का पर्व: फुलदेई
फुलदेई, उत्तराखंड का सुप्रसिद्ध और बच्चों का खूबसूरत त्योहार है. फुलदेई शब्द दो शब्दों से मिल कर बना है. फूल और देई (देळी) अर्थात देहरी. फुलसंग्रांद और फुल फुल माई नाम से भी ये त्योहार जाना... Read more
कल है फूलदेई
पहाड़ के लोग अपनी विशिष्ट संस्कृति के लिये जाने जाते हैं, जाने जाते हैं प्रकृति से अपने प्रेम के लिये. उत्तराखंड के लोग प्रकृति की गोद में पलते और बढ़ते हैं सो उनके जीवन में प्रकृति का हर रंग... Read more
अपने संघर्षों पर हमेशा मुस्कुराने वाले पहाड़ियों के सपनों पर चांदनी एंटरप्राइजेज का गीत: आस
सपनों से दिखने वाले हिमालय के बीच बसे गावों में हर समय सपने पलते हैं. सपनों में कोई फौजी है कोई मास्टर है तो कोई डॉक्टर है. पहाड़ में पला बड़ा कौन ऐसा होगा जिसके मन में कभी डॉक्टर बन सबके दु... Read more
आधी आबादी का बराबरी के लिये संघर्ष
यूं तो वर्ष 8 मार्च 1908 में न्यूयॉर्क शहर में 15 हजार महिला मजदूरों ने अपने काम के घंटे तय करने और बिना भेदभाव के बराबर मजदूरी की मांग और मताधिकार को लेकर जो प्रदर्शन किया. उस प्रदर्शन के ब... Read more
समाज में पर्यावरण के प्रति महिलाओं का दृष्टिकोण
भारतीय समाज के निर्माण में महिलाओं की महत्ती भूमिका रही है. यहां की महिलाओं ने घर, परिवार, समाज एवं राजकीय कार्यों में भी अपनी एक विशेष पहचान दर्ज करवाई है, वहीं सबसे ज्यादा योगदान इनका कला... Read more
गोविन्द वल्लभ पन्त की कहानी ‘फटा पत्र’
प्रजापति और मास्टरों के घंटों में इतनी शरारत नहीं करता था, जितनी पंडित श्रानंदरन साहित्य-शास्त्रीजी के घंटे में. वे जब लड़कों की कापियाँ शुद्ध करते थे, तब लड़के उनकी मेज को चारों ओर से घेर ल... Read more
जिंदगी बनेगी बेहतर, चौकन्नी नजर तो पैदा कर
जीवन रस्सी पर चलने वाले नट जैसा संतुलन मांगता है. हर नए क्षण में संतुलन. क्योंकि इस क्षण अगर इस ओर गिरते थे, तो अगले ही क्षण हम उस ओर गिरने को होते हैं. जीवन में हर क्षण चीजें बदलती हैं. नई... Read more
























