इंतज़ार : युगल जोशी की कहानी
बहुत भागकर वह किसी तरह समय पर बस पकड़ पाया था. (Intezaar Story by Yugal Joshi) सेमेस्टर के इग्ज़ैम के बाद दो हफ़्ते की छुट्टियाँ थीं. यह तब की बात है जब मोबाइल फ़ोन जनता जनार्दन के सपन... Read more
जीवन यूं ही गुजर रहा था तुम्हारे बिना, तुम्हारी दूसरी बार छुट्टी आने की आस में. चिट्ठी का इंतजार रहता था. नजर रहती, पोस्ट ऑफिस से घर तक आने वाली उस संकरी, घुमावदार और चढ़ाई वाली पगडण्डी पर.... Read more
कोसी की सुसाट-भुभाट में पीछे पड़े एक अलच्छन ने पिरदा की बोलती हमेशा के लिये बंद कर दी
“मुक़र्रर (मुकद्दमे) की तारीख़ पड़ी थी पंद्रह, सोलह को यहाँ रेंजर सैप आने वाले थे. कचहरी में ही शाम हो गई. मैंने पिरदा से कहा-लौट चलते हैं घर, रात-बिरात पहुँच ही जाएँगे. अँधेरी रात थी,... Read more
अलविदा मंगलेश दा
जिनकी स्मृति में बिजली के लट्टुओं से जगमग पहाड़ की ही छवि है वो पहाड़ में लालटेन के बिम्ब का निहितार्थ कभी समझ ही नहीं सकते. पहाड़ में लालटेन औद्योगिकीकरण का प्रथम संदेशा लेकर आयी थी. पर पहा... Read more
साझी पीड़: एक बुजुर्ग पहाड़ी विधवा का दर्द
बाहर से छन कर आती हुई धूप में एकाएक वह प्रकट हुई. बाएँ हाथ से घुटने को सहारा देते हुये और दाहिने हाथ से दरवाजा थामते हुए खुद को. मैंने उस अनजान वृद्धा को आते देखकर एक नजर गमी में बैठी दीदी क... Read more
सुनिए शेरदा अनपढ़ की संगीतबद्ध कविता ‘को छै तू’
इस तरह आने वाली पीढ़ी विरासत को संभालते हुए सम्मान देती है, आगे बढ़ाने में अपना योगदान देती है. शेरदा अनपढ़ की लोकप्रिय कविताओं में से एक है ‘को छै तू.’ करन जोशी उत्तराखण्ड के लोकगी... Read more
पुस्तक समीक्षा यह पुस्तक प्रोजेक्ट म्यूस के अन्तर्गत सन् 2017 में यूनिवर्सिटी औफ ईलिनौय प्रेस द्वारा छापी गयी है जिसके लेखक अमरीकी मूल की श्वेत प्रजाती से ताल्लुक रखने वाले स्टीफन फियोल हैं.... Read more
शहीद होते फौजी को अंतिम क्षणों में बीवी के अल्ट्रासाउंड की चिंता सताती रही
राधिका की जब आंख खुली कमरे में अनेस-मनेस हो रखी थी. अभी कुछ देर पहले ही तो आंख लगी थी लेकिन उसे लग रहा था पता नहीं कितना सो गई. आज दिप्पू दो महीने की छुट्टी काटकर जम्मू-कश्मीर जा रहा था. राध... Read more
जिंदे को लात, मरे को भात: एक उत्तराखंडी लोककथा
एक गांव में एक बहुत बूढ़ा अपने छोटे लड़के, बहू और अपनी औरत के साथ रहता था. उसके दो लड़के और भी थे, पर वे नौकरी की तलाश में बाहर चले गए थे और वहीं बस गये थे. बूढा अपने समय में बहुत प्रतिष्ठित... Read more
युगमंच नैनीताल : रंगमंच और सिनेमा जगत को नामचीन कलाकार देने वाला थिएटर ग्रुप
उत्तराखण्ड में रंगमंच के विकास की गरज से साल 1976 में ‘युगमंच’ की स्थापना की गयी. चार दशक के अपने सफर में युगमंच हिन्दी रंग जगत की उन चुनिंदा संस्थाओं में गिना जाता है जो पूरी प्रतिबद्धता, स... Read more


























