मित्ज्यु: कुमाऊं में दोस्ती की अनूठी परम्परा
पिछले दशक तक उत्तराखंड के कुमाऊं क्षेत्र में मित्ज्यु शब्द काफ़ी सुनने को मिलता था. मित्ज्यु का अर्थ होता है अभिन्न मित्र. यह मित्रता इतनी प्रगाढ़ होती थी कि इसे पारिवारिक रिश्तों से भी बढ़कर म... Read more
ख़ाकी मर्ज, फ़र्ज़ और कर्ज़ की खिचड़ी है
युधिष्ठिर सरोवर में लोटा डुबाने ही वाले थे कि बगुला रूपी यक्ष प्रकट हुए और अपनी चिर-परिचित प्रश्नोत्तरी प्रस्तुत की. यक्ष- हे युधिष्ठिर ख़ाकी वर्दी क्या है? युधिष्ठिर- कुत्ता भगा... Read more
1940 के दशक में पिथौरागढ़ की भवन निर्माण शैली
1940 के दशक में पिथौरागढ़ कस्बे और इसके आस-पास सड़क नहीं थी. इस इलाके के दूरदराज तक के गाँव संकरी पगडंडियों से आपस में जुड़े हुए थे. उस दौर में पिथौरागढ़ की भवन निर्माण शैली महात्मा गाँधी के... Read more
जागेश्वर में बानर का स्वांग करने वाले लड़के से सुनिये युवा पहाड़ियों की कहानी
हाँ, सौंणन में खूब रेलमपेल रहने वाली ठेरी फीर. वो मंदिर से यहाँ कुबेर जी के मंदिर तक दिनमान भर नब्बे-सौ चक्कर लग ही जाने वाले हूए मेरे. दनिया-पनुएनौला की रामलीला में भी ऐसे ही कभी बानर, कभ... Read more
उत्तराखंड में महिलाओं के आभूषण किसी को भी आकर्षित कर सकते हैं. इन्हीं आभूषणों में एक नाक की नथ या नथुली. नथ, उत्तराखंड में विवाहित महिलाओं द्वारा नाक में पहना जाने वाला एक आभूषण है. एक पारंप... Read more
रेमन मैगसेसे पुरस्कार की शुरूआत 1957 में फ़िलीपींस के राष्ट्रपति रेमॉन मैगसेसे के नाम पर हुई. यह पुरस्कार एशियाई संस्थाओं व व्यक्तियों को सरकारी सेवा, सार्वजनिक सेवा, सामुदायिक नेतृत्व, पत्र... Read more
बहुत दिनों बाद रक्षा बंधन की छुट्टियों में भोगीलाल जी से मिलना हुआ. चर्चा चल निकली. मैंने कहा कि ये तो गज़ब है ! एक कम्पनी ने पहले फ्री सिम बांटे, फिर फ्री फोन कॉल और फ्री इंटरनेट दिया. अब स... Read more
शिक्षकों की मांग को लेकर उत्तराखंड के सरकारी स्कूल में बच्चों ने लगाया ताला
उत्तराखंड में शिक्षा और स्वास्थ्य का हाल किसी से छुपा नहीं है. हालिया ख़बर पौढ़ी जिले के राजकीय इंटर कालेज बैजरो की है. शिक्षकों की मांग के लिये इस स्कूल के छात्राओं ने स्कूल में अनिश्चितकाल त... Read more
दाड़िम के फूल – इस कहानी की एक कहानी है
मेरी कहानी ‘दाड़िम के फूल’ की भी एक मजेदार कहानी है. आनंद तब आए जब इससे पहले मेरे दोस्त बटरोही की कहानी ‘बुरांश का फूल’ पाठकों को पठने को मिले. तब यानी सन् 60 के दशक में हम नैनीताल के डीएसबी... Read more
मां गंगा के आंचल में टनों गंदगी छोड़ गए कांवड़िये
हरिद्वार में गंगाजल लेने आए कांवड़ियों द्वारा अराजक तरीके से फैलाई गयी गन्दगी की सफाई करना प्रशासन के लिए चुनौती बना हुआ है. इतना ही नहीं शहर में चारों तरफ फैले बेतरतीब कूड़े और अस्थायी पार्... Read more


























