दाड़िम के फूल – इस कहानी की एक कहानी है
मेरी कहानी ‘दाड़िम के फूल’ की भी एक मजेदार कहानी है. आनंद तब आए जब इससे पहले मेरे दोस्त बटरोही की कहानी ‘बुरांश का फूल’ पाठकों को पठने को मिले. तब यानी सन् 60 के दशक में हम नैनीताल के डीएसबी... Read more
मां गंगा के आंचल में टनों गंदगी छोड़ गए कांवड़िये
हरिद्वार में गंगाजल लेने आए कांवड़ियों द्वारा अराजक तरीके से फैलाई गयी गन्दगी की सफाई करना प्रशासन के लिए चुनौती बना हुआ है. इतना ही नहीं शहर में चारों तरफ फैले बेतरतीब कूड़े और अस्थायी पार्... Read more
लम्बी धोती और छोटी धोती के नखरे
जैसा की देश भर में होता है कुमाऊं में भी ब्राह्मणों के अंदर जातीय वरिष्ठता होती है. जिसे मोटे तौर पर ठुल्ल धोत्ती और नान् धोत्ती दो भागों में बांटा जा सकता है. जिसका अर्थ लम्बी धोती और छोटी... Read more
आप पिथौरागढ़ में केमू स्टेशन से नीचे सिनेमा लाइन की ओर बड़ रहे हैं और तभी पीछे से कोई हल्की सी आवाज में नजर चुराकर आपसे कहे दाज्यू फर्स्ट क्लास का टिकट लोगे फर्स्ट क्लास का. यह किसी कल्पना का... Read more
केंद्र सरकार ने पद्म विभूषण, पद्म भूषण और पद्मश्री पुरस्कारों की घोषणा की है. उत्तराखण्ड के अनिल जोशी और कल्याण सिंह रावत को पद्मश्री पुरस्कार दिया जायेगा. उत्तराखंड में मैती आंदोलन पर्यवारण... Read more
यारसा गम्बू उच्चहिमालय के कुछ क्षेत्रों में 3500 से 5000 मीटर तक की उंचाई में होता है. यारसा गम्बू, तिब्बती भाषा का शब्द है. स्थनीय भाषा में इसे जडि, क्यूर झार, कीड़ा, कीड़ाघास कहा जाता है. गर... Read more
कम लोग ही जानते हैं कि मडुवा मूल रूप से इथोपिया और युगांडा देश का एक मोटा अनाज है जिसे आज विश्व में भारत समेत केन्या, जायरे, जाम्बिया, जिम्बाब्वे, तंजानिया, सूडान, नाइजीरिया, मोजम्बीक, नेपा... Read more
शहीद ऊधम सिंह की पुण्यतिथि पर
ऊधम सिंह नगर, उत्तराखंड के तराई क्षेत्र में स्थित एक जिला है जो 1995 से पूर्व नैनीताल जिले का ही हिस्सा हुआ करता था. अक्टूबर 1995 में मायावती सरकार ने नैनीताल से तराई क्षेत्र को अलग कर एक नय... Read more
मिरतोला आश्रम (पनुआनौला) में ऑस्ट्रेलिया से आ बसे अर्थशास्त्र के मनीषि, योजना आयोग के सदस्य, कृष्ण भक्त स्वामी माधवाशीष ने 90 के दशक में डॉक्टर जैक्सन के साथ धारक क्षमता (कैरीइंग कैपिसिटी) क... Read more
मानव सभ्यता का अगला पड़ाव: ऑटोमेशन, नई नैतिकता और एक ‘वैश्विक निकम्मा वर्ग’ हमारे भविष्य की तस्वीर कैसी होगी- एक सदी नहीं बल्कि महज दो दशकों के बाद? (Yuval Harari Future of Manki... Read more


























