श्रीदेव सुमन 25 मई, 1916 – 25 जुलाई, 1944 ब्रिटिश राज और टिहरी की अलोकतांत्रिक राजशाही के खिलाफ लगातार आन्दोलन कर रहे श्रीदेव सुमन को दिसंबर 1943 को टिहरी की जेल में नारकीय जीवन भोगने... Read more
खुदेड़ : नराई से जन्मा पहाड़ी लोकगीत
करीब दस एक साल पहले तक गढ़वाल के गांवों में मोछंग की धुन के साथ दर्द भरी आवाज में गीत सुनने को मिल जाते थे. ये गीत सामान्यतः महिलाओं द्वारा गाये जाते जिनमें पहाड़ का दर्द साफ़ झलकता था. नवविवाह... Read more
अब मैं सूरज को नहीं डूबने दूंगा
अब मैं सूरज को नहीं डूबने दूंगा - सर्वेश्वर दयाल सक्सेना देखो मैंने कंधे चौड़े कर लिये हैं मुट्ठियाँ मजबूत कर ली हैं और ढलान पर एड़ियाँ जमाकर खड़ा होना मैंने सीख लिया है. घबराओ मत मैं क्ष... Read more
पैमाने की तरह शराब पिया करो पहाड़ियो! – उत्तराखंड महिला आयोग अध्यक्ष की नसीहत
उत्तराखंड के गांवों में अगर आप गये होंगे तो आपको इस बात की जानकारी होगी की शराब ने किस कदर यहां के अनेक परिवार बर्बाद कर दिये हैं. उत्तराखंड की महिलाओं द्वारा हमेशा से शराब का विरोध किया गया... Read more
चम्पावत का बालेश्वर मंदिर: कमल जोशी के फोटो
कुमाऊँ में टनकपुर से लगभग 75 किमी दूर 1670 मीटर की ऊंचाई पर स्थित चम्पावत का मशहूर बालेश्वर मंदिर शिल्प व लोकथात की समृद्ध पूंजी है. ऐतिहासिक प्रमाणों के अनुसार चौदहवीं शताब्दी में चम्पावत ब... Read more
चार्ल्स शेरिंग की किताब ‘वेस्टर्न तिब्बत एंड ब्रिटिश बॉर्डरलैंड’ साल 1906 में लन्दन के एडवर्ड आर्नल्ड प्रकाशन ने छापी थी. ब्रिटिश राज की भारतीय सिविल सेवा में कार्य कर चुके चार्ल्स शेरिंग अल... Read more
नैनीताल में नसीरुद्दीन शाह के शुरुआती दिन
देश के सर्वकालीन महानतम अभिनेताओं में से एक नसीरुद्दीन शाह ने अभी कुछ दिन पहले अपना जन्मदिन मनाया है. यह अलग बात है कि अपनी आत्मकथा ‘ एंड देन वन डे’ में वे लिखते हैं – “मेरा जन्म लखनऊ के नजद... Read more
दोगांव की टिक्की न खाई तो क्या खाया
हल्द्वानी-नैनीताल राजमार्ग पर हल्द्वानी से 14 किलोमीटर दूर स्थित दोगांव बहुत लम्बे समय से पहाड़ की तरफ आने-जाने वाली गाड़ियों का एक जरूरी पड़ाव रहा है. और दोगांव का नाम आने पर ऐसा हो ही नहीं... Read more
आने वाली पीढ़ियों के लिए पानी बचाना होगा
थार रेगिस्तान में तापमान पचास डिग्री तक पहुंचने, हर तीसरे साल अकाल, दुकाल, त्रिकाल पड़ने पर यहां के ग्रामीण जन परेशान तो होते हैं, पर विचलित नहीं होते. यही कारण है कि दुनिया भर के रेगिस... Read more
बांस के डंडों और ग्रामीणों के कन्धों पर चल रही है उत्तराखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था
ऊपर जो तस्वीर आप देख रहे हैं वह उत्तराखंड के गांव बुरायला की है. चार कंधे, दो बांस की डंडियों के ऊपर लाल कम्बल में लेटी हुई महिला की यह तस्वीर उत्तराखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था के विषय में अपन... Read more


























