अल्मोड़े का ठसका
चापलूस-भलेमानुस की छवि बनाए रखना दुकानदारी की पहली शर्त है. एक दुकानदार को सफलता हासिल करने के लिए झूठमूठ हंसने और हेंहें करने की कला को साध लेना होता है. ग्राहक को कूड़ा भिड़ाना कोई आसान का... Read more
बीमार पड़ते नैनीताल शहर का संघर्ष: कल, आज और कल
1842 के बाद एक शहर के रूप में अस्तित्व में आए नैनीताल शहर को वैदिक काल से त्रि ऋषि सरोवर नाम से जाना जाता रहा है. लेकिन ब्रिटिश भारत में शाहजहांपुर में सक्रिय शराब व्यवसाई बैरन और उस वक्त के... Read more
यह लेख भी सन् 1920 में डाँग श्रीनगर निवासी श्री गोविन्दप्रसाद घिल्डियाल, बी.ए. डिप्टी कलेक्टर, उन्नाव द्वारा लिखित और विश्वंभरदत्त चन्दोला द्वारा गढ़वाली प्रेस, देहरादून से प्रकाशित, पुस्तक... Read more
रानीखेत रोड से बाजार की तरफ बढ़ने पर बाईं ओर एमईएस परिसर की तरफ पक्के पैराफिट से लगे कई कच्चे फड़ थे, जिसमें एक चाय की दुकान कोई वयोवृद्ध व्यक्ति की हुआ करती थी. चौगर्खा पट्टी के होने से लोग... Read more
तो, नित्यानंद मैठाणी जी भी चले गए. 14 सितम्बर, 2020 की रात 86 वर्ष की आयु में लखनऊ में उनका निधन हो गया. कोई दस दिन पहले उनसे बात हुई थी. आवाज बहुत क्षीण थी. हाल में उन्होंने अपना बेटा खो द... Read more
अपने गीतों व गायन के माध्यम से लोगों में जनचेतना का संचार करने वाले और उत्तराखण्ड आन्दोलन के दौरान, लस्का कमर बाँधा, हिम्मत का साथा और धैं द्यूणौ हिंवाल च्यलौ ठाड़ उठौ, जगाओ मुछ्याल च्यलौ ठा... Read more
मुक्तेश्वर से बॉलीवुड तक निर्मला की उड़ान
मुक्तेश्वर जैसे छोटे से कस्बे ताल्लुक रखने वाली निर्मला ने आखिर मायानगरी में अपना मुकाम बना ही लिया. निर्मला तमाम फिल्मों, धारावाहिकों में काम कर चुकी हैं. 21 सितम्बर से जी. टीवी के धारावाहि... Read more
इक्कीसवीं सदी के बहुत प्रतिभाशाली बुद्धिजीवी और हिब्रू यूनिवर्सिटी युरोशलम में प्रोफेसर युवाल नोवा हरारी अपने एक लेख में बताते हैं – मनुष्य हमेशा से उपकरणों के आविष्कार करने में माहिर... Read more
मुनस्यारी के चचा के बहाने इंजीनियरिंग के जमीनी पाठ
गांव में एक चचा थे, सरिया और एल्युमिनियम के तार मोड़कर इतनी जबर्दस्त गाड़ियां बनाते थे कि क्या कहने, रविवार को अलसुबह हम सब बच्चे कचड़े के ढेर से रबड़ के फटे पुराने चप्पल जूते और रंग बिरंगे... Read more
सिद्धपीठ हरियाली कांठा मंदिर
दोस्तों, बचपन में होश संभालते ही सामाजिक रीति-रिवाजों के बावत जानकारी होना शुरू हुई. इन्हीं में से एक ‘भाड़’ हो जाना, इसमें यदि किसी औरत ने सांप देख लिया हो तो वह उस दिन गाय-भैंस... Read more


























