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1 Comments

  1. Abhay Pant

    वाह! नमन है देवभूमि के समाज को 🙏🙏। न्यायालय द्वारा राणा जी के पक्ष में निर्णय सुनाने के उपरांत भी यदि उनको अपनी ही ज़मीन वापस न मिली, तो ठीक ही हुआ फिर कि 1994 के असंख्य बर्बरतापूर्ण अन्यायों को करने वाले अपराधियों को आज तक सज़ा न मिल सकी है। ऐसा समाज किस प्रकार भविष्य के सपने साकार करने की धृष्टता कर सकता है, जब वह अपने ही दैदीप्यमान व्यक्तित्वों का सम्मान नहीं कर सकता? जब प्रखर पुरुषों की यह हालत है, तो समाज की ताकत के बारे में सहज ही अनुमान लगाया जा सकता है। एक चावल ही काफी होता है पूरी हांडी का हाल बताने को।

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