इन चार उपवासों से बनाएं जीवन को और बेहतर
अगर आप अपने लिए शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक और आध्यात्मिक स्वास्थ्य की कामना करते हैं, तो आपको चार तरह के उपवास रखने होंगे. जी हां, ये चार उपवास आपमें एक खास आध्यात्मिक विश्वास को जन्म देंगे.... Read more
उत्तराखण्ड में जन्मे नरेन्द्र सिंह नेगी ऐसे रचनाकार हैं जिनके सृजन में हिमालय का प्रतिनिधित्व झलकता है. उनका सृजन त्रिस्तरीय है. शब्द, संगीत और स्वर तीनों स्तर में पहाड़ी जनजीवन की आत्मा का... Read more
शिक्षक दिवस : राष्ट्रपति ज़ाकिर हुसैन द्वारा सम्मानित अल्मोड़ा के दयासागर मासाप
कलर्स चैनल के धारावाहिक बालिका वधू के कालजयी किरदार सांची से हर घर में पहचानी जाने वाली अल्मोड़ा की रूप दुर्गापाल टेलीविजन के रुपहले परदे की जानी-मानी अदाकारा हैं. शिक्षक दिवस... Read more
बागेश्वर के खर्कटम्टा गांव से तीन ताम्र शिल्प कारीगरों की बात जो लुप्त होती कला को बचाने में लगे हैं
बागेश्वर जिले के खर्कटम्टा गांव में कभी तांबे से बनने वाले बर्तनों की टन्न… टन्न की गूंज दूर घाटियों में सुनाई पड़ती थी, लेकिन वक्त की मार के चलते ये धुनें अब कम ही सुनाई देती हैं. हांलाकि,... Read more
शालिग मामा जी की शादी (26 अक्टूबर 1967 तारीख मामी जी ने बतायी है) की याद है. बरात तल्ली चामी से नैल गांव (लगभग 10 किमी पैदल) जानी थी. रॉकी (मौसी का लड़का) अर मैंने बरात में जाने का गुपचुप प्ल... Read more
गढ़वाल की राजधानी देवलगढ़ से श्रीनगर स्थानान्तरित हो चुकी थी. राजा महिपति शाह की मृत्यु के बाद उनके पु़त्र पृथ्वीपति शाह राज गद्दी के उत्तराधिकारी हुये. उस समय पृथ्वीपति शाह की उम्र महज सात... Read more
सालाना करोड़ों मुनाफ़ा कमाने वाली चंडाक मैग्नेसाइट फैक्ट्री के बंद होने की कहानी
प्रख्यात भूगर्भशास्त्री डॉ. खड्ग सिंह वल्दिया ने अपने अध्ययन में यह आंकलन किया था कि पिथौरागढ़ जनपद में मैग्नेसाइट के विशाल भंडार विद्यमान हैं. तदन्तर प्रोफेसर नौटियाल, नाथ एवं बाकलू, दूबे ए... Read more
महाभारत पढ़ने का सही तरीका
पुराने लोग कहते थे, घर में महाभारत नहीं रखनी चाहिए. जिस घर में रहेगी, उसी घर में महाभारत शुरू हो जाएगी. वे बच्चों को महाभारत पढ़ने से रोकते थे, टोकते थे.(Mahabharata Lalit Mohan Rayal) जानका... Read more
यह तस्वीर रामगंगा की है. तस्वीर 1892 में अपनी भारत यात्रा के दौरान जर्मन फोटोग्राफर कर्ट बोएक ने ली है. इस तस्वीर को उन्होंने अपनी किताब में शामिल किया जो 1894 में प्रकाशित हुई. जर्मन भाषा म... Read more
सिलबट्टे (सिल-लौढ़) का उत्तरांचली रसोई में एक विशेष महत्व रहा है. शगुन के एकाकी कार्य हो या रोजमर्रा की जिंदगी में रसोई चलाने के, सिलबट्टा हमारे पुरखों का जूसर, मिक्सर व ग्राईन्डर (थ्री-इन-व... Read more
























