उत्तराखण्ड के पारम्परिक लोक पर्व को पुनर्जीवित करने हेतु भाव राग ताल की कार्यशाला
भाव राग ताल नाट्य अकादमी पिथौरागढ़ द्वारा ओएनजीसी के सहयोग से पिथौरागढ़ जिले के दो गांव बसौड़ और बोकटा में कार्यशाला आयोजित की गई. जिसमें उत्तराखण्ड के पारम्परिक लोक पर्व जैसे हिलजात्रा एवं... Read more
हिंदी के कथाकारों में शेखर जोशी बड़ा नाम हैं. आपसी संबंध, आंचलिकता और पर्वतीय जीवन से सरोबार उनकी कहानियां दुनियाभर में पसंद की जाती हैं. अल्मोड़ा के ओलिया गांव में जन्में शेखर जोशी की कहानि... Read more
हिमालय से हम हैं और हमारे लिए हिमालय
हिमालय अमर नहीं है. गोंडवानालैंड के जमाने में ये था ही नहीं. गोंडवानालैंड के एक हिस्से के छिटक कर एशियाखंड से मिलने या टकराने से अस्तित्व में आया था हमारा हिमालय. पर्वत श्रृंखलाओं की बिरादरी... Read more
जब दूरदराज के इलाकों में सेवाएं देने के लिए शिक्षकों में कुछ अतिरिक्त योग्यताओं की जरूरत पड़ती थी
दूरदराज के इलाकों में सेवाएं देने के लिए, उन दिनों शिक्षकों में कुछ अतिरिक्त योग्यताओं की जरूरत पड़ती थी. स्वास्थ्य-सेवाओं के नाम पर, वहां पर कुछ भी नहीं होता था. डिस्पेंसरी तो छोड़िए, फार्म... Read more
सिर्फ बर्फ से ढकी चोटियां हिमालय नहीं होती
हिमालय की पहली स्मृति नर्सरी क्लास की है जब हमें पिकनिक के लिए अल्मोड़े से कौसानी ले जाया गया था. एक बहुत विशाल हिमपुंज के सामने अवाक हो गए तीन-चार बरस के एक दुबले बच्चे की छवि धुंधली याद की... Read more
बरसात के दिनों धुले हुये पहाड़ अपने नये रंग में दिखते हैं. चटख हरे रंग की हरियाली और ऊंचे पहाड़ों के आगे उमड़ते सफ़ेद बादल हर लम्हें को एक तस्वीर में बदलकर रखते हैं. एक तस्वीर जिसे इंसान साल... Read more
श्रीधर आजाद : तन-मन से आज़ाद राजर्षि-सेनानी
1949 से 1950 तक तथा 1952 से 1958 तक गढ़वाल (वर्तमान पौड़ी,चमोली व रुद्रप्रयाग का संयुक्त नाम) के डिस्ट्रिक्ट बोर्ड चेयरमैन रहे, स्वतंत्रता सेनानी श्रीधर आजाद, आजाद जी के नाम से पूरे गढ़वाल म... Read more
साल 1964 का जुलाई का महीना रहा होगा, जब भवाली के गोबिन्द बल्लभ पन्त हायर सेकेन्डरी स्कूल में दर्जा 6 में दाखिला लिया और शुरू हुआ भवाली से नजदीक से रूबरू होने का सिलसिला. यों हमारा मुख्य बाजा... Read more
अल्मोड़ा हुक्का क्लब से इंग्लैण्ड के मैदान तक एकता बिष्ट का सफ़र : एक्सक्लूसिव इंटरव्यू
विश्व में जब भी सर्वश्रेष्ठ महिला गेंदबाजों की बात की जायेगी तो एकता बिष्ट का नाम हमेशा याद किया जाएगा. अल्मोड़ा में हुक्का क्लब के छोटे से मैदान में पलास्टिक की बॉल से इंग्लैण्ड के चमकदार ब... Read more
सुरेंद्र सिंह वल्दिया : सोर घाटी से अर्जुन अवार्ड तक एक ठेठ पहाड़ी की यात्रा
सोर घाटी में जूनून की हद तक खेलों की दीवानगी रही है. छोटे बड़े मैदानों में सुबह शाम जमा होते खिलंदड़े, अपने बदन की ताकत को एक फन में बदलते, मांसपेशियों का जोर दिखाते, भुजाओं में उभर आ रही मछ... Read more


























