फूलो का कुर्ता : यशपाल की कहानी
हमारे यहां गांव बहुत छोटे-छोटे हैं. कहीं-कहीं तो बहुत ही छोटे, दस-बीस घर से लेकर पांच-छह घर तक और बहुत पास-पास. एक गांव पहाड़ की तलछटी में है तो दूसरा उसकी ढलान पर. (Phoolo Ka Kurta Yashpal)... Read more
कहानी : गाँव में कुछ बहुत बुरा होने वाला है
एक बहुत छोटे से गाँव की सोचिए जहाँ एक बूढ़ी औरत रहती है, जिसके दो बच्चे हैं, पहला सत्रह साल का और दूसरी चौदह की. वह उन्हें नाश्ता परस रही है और उसके चेहरे पर किसी चिंता की लकीरें स्पष्ट हैं.... Read more
शैलेश मटियानी की कहानी : बित्ता भर सुख
अपने इस नए कार्यक्षेत्र में आने के बाद उसे यह पहला बच्चा जनवाना है. परसों जब वह यहाँ पहुँची, शाम काफी गहरी हो चुकी थी. जहाँ से वह आई है, शहर नितांत छोटा-सा, मगर शहर की अन्य सुविधाओं के साथ,... Read more
ज्ञान पंत की रचनाओं में बसता है समूचा पहाड़
हाल ही के वर्षो में ’बाटुइ’ शीर्षक से प्रकाशित कविता संग्रह कुमाउनी साहित्य में रुचि रखने वालों लोगों के लिए एक नायाब कृति के रुप में उभर कर आई है. वरिष्ठ रचनाकार ज्ञान पंत द्वारा इस संग्रह... Read more
शैलेश मटियानी की कहानी : ऋण
सब झूठ-भरम का फेर रे-ए-ए-ए…माया-ममता का घेरा रे-ए-ए-ए…कोई ना तेरा, ना मेरा रे-ए-ए-ए… नटवर पंडित का कंठ-स्वर ऐसे पंचम पर चढ़ता जा रहा था, जैसे किसी बहुत ऊँचे वृक्ष की चूल पर... Read more
स्वाति मेलकानी की कहानी ‘नेपाल में सब ठीक है’
“आपका स्कूल भी बंद है मैडम जी?” खिमदा ने मुझे देखते ही पूछा. जवाब भी उसने खुद ही दे दिया, “इस बार तो बहुत नुकसान हो गया. हमारे मालिक साहब का स्कूल भी कई दिनों से बंद है. बच... Read more
एक तीली आग : जैक लंडन की कालजयी कहानी
वह सुबह ठिठुरन और कोहरे भरी थी. शीत और कोहरा अपने चरम पर था जब उस आदमी ने प्रमुख यूको पगडंडी को छोड़ पहाड़ी पर चढ़ना प्रारंभ किया जहाँ से बाँस के इलाके को जाने वाली कभी कभार उपयोग में लाई जा... Read more
आकाश कितना अनंत है
जो रिश्ता पिछली सर्दियों में तय हुआ, उसे तोड़ दिए जाने का निर्णय लिया जा चुका है. अब उसकी शादी दिल्ली-जैसे बड़े शहर में नौकरी करने वाले लड़के से होगी. जसवंती को ऐसा लग रहा है, सिर्फ इतना जान... Read more
पोस्टमैन : शैलेश मटियानी की कहानी
लिफाफे के बाहर पता यों लिखा हुआ था :सोसती सिरी सरबोपमा – सिरीमान ठाकुर जसोतसिंह नेगी, गाँव प्रधान – कमस्यारी गाँव में, बड़े पटबाँगणवाला मकान, खुमानी के बोट के पास पता ऊपर लिखा, प... Read more
कहानी – पहाड़ की याद
जून के महीने की भरी दोपहरी. इतना भरा पूरा गांव आराम की मुद्रा में था. इसलिए चारों ओर खामोशी सी पसरी थी. इस खामोशी को अगर कभी-कभी तोड़ रहे थे तो वे तीन प्राणी थे— अम्बर, धरा और कालू नाम का भो... Read more


























