जनता को उत्तराखंड पुलिस पर भरोसा क्यों नहीं है
अंकिता भंडारी हत्याकांड में डिटेल्ड पोस्टमार्टम रिपोर्ट न आने की वजह से परिवार ने अंकिता के शव का दाह संस्कार करने से मना कर दिया है. उत्तराखंड पुलिस पहले दिन से आलोचना झेल रही है. त्वरित का... Read more
उत्तराखण्ड विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खण्डूड़ी भूषण ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर राजस्व पुलिस की व्यवस्था को समाप्त कर सामान्य पुलिस की व्यवस्था लागू कर थाने-चौकिया स्थापित करने का अनुरोध किया है.... Read more
अंकिता भंडारी केस में अब तक क्या हुआ?
इस मामले में कुछ सवाल अभी भी बाकी हैं. मसलन इतने गंभीर मामले में केस रेगुलर पुलिस को सौंपने में प्रशासन ने जो हीलाहवाली की उसकी जिम्मेदारी किसकी है. इस गंभीर लापरवाही के दोषियों के खिलाफ एक्... Read more
भाजपा नेता का बेटा निकला अंकिता का हत्यारा
पौड़ी गढ़वाल की अंकिता भंडारी की हत्या की पुष्टि पुलिस द्वारा कर दी गयी है. अंकिता का हत्यारा रिजार्ट मालिक पुलकिट आर्य ही निकला. पुलकित आर्य भाजपा पूर्व राज्य मंत्री भाजपा विनोद आर्य का बेट... Read more
नेगीदा की वसंत नायिका
काव्य कला का सौष्ठव उसके सब कुछ कह देने में नहीं, बल्कि, अनकहे अंश में है. जैसे अपने पति का नाम न लेने वाली कोई ग्रामीण-नायिका, पति के बारे में पूछे जाने पर हल्के-से मुस्कुरा दे, और नैनो के... Read more
औरत पहाड़ का नाम है
आंचलिक भाषा मेंमांगलिक गीत गाते हुएवे रोपती हैंज़िदगी की जड़ें पानी में रंग-बिरंगी पोशाकेंमाटी में सने हाथजैसेपिघले सोने में सने हाथ ज़मीन को दिन भर नमन करती कमरशाम को चूल्हे से होते हुएबिस्... Read more
आज शमशेर सिंह बिष्ट की पुण्यतिथि है
यह जनवरी 1974, का वाकिया है जब प्रसिद्ध गांधीवादी सर्वोदय कार्यकर्ता श्री सुंदरलाल बहुगुणा उत्तराखंड में अपनी 127 दिवसीय 1500 किलोमीटर लंबी यात्रा के मध्य अल्मोड़ा में रैन बसेरा होटल में ठहर... Read more
भारतीय इतिहास लेखन में क्षेत्रीय इतिहास की भूमिकाः उत्तराखण्ड के संदर्भ में
भारत के प्रथम ऐतिहासिक ग्रंथ राजतरंगिणी के रचियता कल्हण ने ठीक ही कहा है— श्लाध्यः स एव गुणवान् रागद्वेष बहिष्कृता भूतार्थकथने यस्य स्थेयस्येव सरस्वती अर्थात्, ‘वही गुणवान प्रशंसन... Read more
जीवन का सत्य है अज्ञेय की कहानी ‘दुःख और तितलियाँ’
शेखर उस पहाड़ी से उतरता हुआ चला जा रहा था. उसके क़दम अपनी अभ्यस्त साधारण गति से पड़ रहे थे, वह किसी प्रकार की जल्दी नहीं कर रहा था क्योंकि यद्यपि वह अपने मन में उसे स्वीकार नहीं कर रहा था, त... Read more
1880 की त्रासदी से भी सबक नहीं ले पाये नैनीतालवासी
सन् 1880 का वह दौर, जब नैनीताल में मानवीय दखल न के बराबर थी. 1841 में खोजे गये इस शहर को आबाद हुए 40 साल से भी कम का समय गुजरा था. तब महज 10,054 की कुल जनसंख्या वाले इस नवोदित शहर में आज ही... Read more


























