उत्तराखंड के आदि निवासी कौन हैं
उत्तराखंड के आदि निवासी कौन हैं सदियों से बहस का मुद्दा रहा है. सवाल का उत्तर जो भी हो पर इस बात पर दोराय नहीं है कि वर्तमान में उत्तराखंड में रहने वाली अधिकांश जातियां बाहरी हैं. यहां रहने... Read more
रैदास के वंशज हैं उत्तराखण्ड के दास
यूं तो हिंदी भाषा में दास शब्द का सामान्य अर्थ है किसी के अधीन रहने वाला सेवक नौकर— दास के कई रूप हुआ करते हैं. लेकिन उत्तराखण्ड में दास ताल वाद्य बजाने और देववाणी गाने वाले ख़ास जनों को कहा... Read more
अपनी-अपनी बोली के हिसाब से कोई उन्हें एजेंटी बूबू कहता है तो कोई अजेंडी बूबू. बूढ़े सफ़ेद कपड़े और सफ़ेद पगड़ी पहने लम्बी दाड़ी वाले एजेंडी बूबू अपने हाथ में अपने से लम्बी एक लाठी लेकर चलते... Read more
सदियों पहले श्यामखेत का पूरा भूभाग एक झील था
भवाली, कुमाऊॅ की यात्रा के लिए एक मुख्य जंक्शन होने के साथ ही रामगढ़, मुक्तेश्वर, तितोली, हरतफा, निगलाट जैसी फल पट्यिों के करीब होने से फलों के खरीद केन्द्र के रूप में भी अपनी पहचान रखता है.... Read more
उत्तराखण्ड की शौर्य गाथा एक कैलेंडर में
प्रज्ञा आर्ट्स थिएटर ग्रुप कला और संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए समर्पित है. दिल्ली से संचालित होने वाले थियेटर ग्रुप प्रज्ञा आर्ट्स को मूल रूप से उत्तराखण्ड की रहने वाली लक्ष्मी रावत संचालि... Read more
कोसी की सुसाट-भुभाट में पीछे पड़े एक अलच्छन ने पिरदा की बोलती हमेशा के लिये बंद कर दी
“मुक़र्रर (मुकद्दमे) की तारीख़ पड़ी थी पंद्रह, सोलह को यहाँ रेंजर सैप आने वाले थे. कचहरी में ही शाम हो गई. मैंने पिरदा से कहा-लौट चलते हैं घर, रात-बिरात पहुँच ही जाएँगे. अँधेरी रात थी,... Read more
थोकदार: मध्यकालीन उत्तराखण्ड का महत्वपूर्ण पद
मध्यकालीन उत्तराखण्ड में थोकदार का पद बहुत महत्वपूर्ण हुआ करता था. थोकदार का काम भी बूड़ों और सयानों जैसा ही था. लेकिन इनके अधिकार बूड़ों और सयानों से कुछ कम हुआ करते थे. राज्य के प्रबंध में... Read more
बाईस बरस की आयु में एक नौजवान अपने आस पास की दुनिया में बदलाव के लिए “उत्तरकाशी भ्रष्टाचार निरोधक संघ” की बुनियाद डालता है जिसे वह “आदर्श नागरिक संघ” नाम देता है. यह... Read more
पिथौरागढ़ महाविद्यालय को बने अब आठ एक साल हो चुके थे. 1970 में महाविद्यालय ने ईश्वरी दत्त पन्त के रूप में अपने पहले अध्यक्ष को भी चुन लिया था. पर एक सीमांत में बने इस महाविद्यालय में अब भी म... Read more
पहाड़ी गांवों और शहरी कस्बों के बीच चौड़ी होती खाई
मैं उत्तराखंड का रहने वाला हूं, पर्वतीय जिले अल्मोड़ा के मुख्यालय में या वहां की आम भाषा में कहूं तो मैं अल्मोड़ा बाजार में रहता हूं. मैं अक्सर अपने जिले के गांवों तक हमेशा नहीं पहुंच पाता ल... Read more


























