स्वामी विवेकानंद को भारतीय इतिहास में ऐसे दिव्य व्यक्तित्व के रूप में देखा जाता है, जिन्होंने देश के युवाओं को सबसे ज्यादा प्रभावित किया. हालांकि उनसे प्रभावित होने वालों और उन्हें आदर्श मान... Read more
काफी समय बाद बस से यात्रा की. यात्रा देहरादून से रानीखेत की थी. मैदान से पहाड़ों की बसों में बजाए जाने वाले गीत कुछ इस प्रकार होते हैं— उदाहरण के तौर पर देहरादून से हरिद्वार तक देशी छैल... Read more
सोशियल मीडिया के टोपी और नथुली चैलेंज के बीच पहाड़ में 23 साल की राखी जिन्दगी का चैलेंज हार गयी
यह तस्वीर 23 साल की राखी की है. टिहरी जिले की नैलचामी पट्टी के ठेला गांव की राखी. पिछले दिनों जब उत्तराखंड के लोग सोशियल मिडिया पर टोपी और नथुली चैलेन्ज खेल रहे थे उसी दौरान रुद्रप्रयाग की य... Read more
पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत की राजनीतिक सूझ-बुझ के कायल उनके विरोधी भी रहते हैं. कभी ककड़ी तो कभी काफल पार्टी का आयोजन कर वह बखूबी जानते हैं कि सुर्ख़ियों में कैसे रहा जाता है. इन दिनों पूर्व... Read more
हल्द्वानी नगर का इतिहास
उत्तराखण्ड के कुमाऊं मण्डल का प्रवेश द्वार हल्द्वानी तब तक एक गांव ही था जब तक इसे व्यापारिक मंडी के रूप में बसाने की शुरुआत नहीं हुई थी. चंद शासनकाल में इसे गांव का ही दर्जा हासिल था. तब इस... Read more
माधो सिंह भण्डारी उत्तराखण्ड के मध्यकालीन इतिहास के वीर योद्धा हैं. माधो सिंह भण्डारी के शौर्य व पराक्रम के किस्से आज भी कहे-सुने जाते हैं. माधो सिंह भण्डारी का जन्म सत्रहवीं शताब्दी के अंत... Read more
चौकोड़ी से केमू की बस पकड़ने की पुरानी याद
दादा के घर से चौकोड़ी, गोल टोपी सी दिखती है. लगता है जैसे प्रकृति ने चोटी को ठंड से बचाने के लिए टोपी पहना दी हो. चढ़ाई पार करते हुए फूँ-फाँ होने लगी तो उन्होंने बताया कि पार वो जो गाड़ी आते... Read more
जब पुरुष बन कर दौड़ी बॉबी गिब
बॉबी गिब ने चलना सीखते ही दौड़ना शुरू कर दिया था. उसकी बाकी सहेलियां भी दौड़ा करती थीं लेकिन तेरह-चौदह की आयु तक उन्होंने दौड़ना छोड़ दिया. बॉबी बीस की हुई तब भी दौड़ ही रही थी. जाहिर है उसे... Read more
उत्तराखण्ड के कुमाऊं मंडल का प्रमुख पहाड़ी जिला है अल्मोड़ा. यह ऐतिहासिक शहर कभी कुमाऊं डिवीजन का मुख्यालय हुआ करता था. कहा जाता है कि इसका नाम अल्मोड़ा घास (रुमेक्स हेस्टाटा) के नाम पर पड़ा... Read more
बूड़ी देवी को चढ़ाई जाती है पत्थरों की भेंट
उत्तराखण्ड के पर्वतीय क्षेत्र के लोगों को बाहरी आक्रमणकारियों के अलावा ठकुराइयों द्वारा एक दूसरे की गढ़ियों को हड़पने के लिए की जाने वाली लडाइयों का भी सामना करना पड़ता था. इन आक्रमणों का सा... Read more


























