हम होंगे सिनला पार एक दिन – 2 वैन आगे बढ़ी तो मन में दारमा-व्यास की रहस्यमयी घाटियों की अनदेखी तस्वीरें हिलोरें लेने लगीं. इरादा था कि दोपहर तक हम धारचूला पहुंच जाएंगे और वहां नोटिफाइड... Read more
बसंत ऋतु आई गेछ फूल बुरूंशी जंगलो पारा
ठंड से ठिठुरते पहाड़ में लकदक पड़ी बरफ पिघलती है तो जबरदस्त कुड़कुड़ाट होता है. ह्युं पड़ते बखत तो चारों तरफ से घिर रहे बादल सब दिखने वाली चोटियों से लिपट जाते. एक गुम्म सी चुप्प लग जा... Read more
हमारे पहाड़ों में सभी लोग संक्रांत कोई त्यौहार में पूरे गांव बाखली में दो-दो पूरी और एक बड़ा (पैड) देने का रिवाज आज समाप्ति की ओर बढ़ता नजर आ रहा है. (Fading Customs in Uttarakhand) अब न तो... Read more
पहाड़ और मेरा जीवन – 66 (पिछली क़िस्त: वो शेर ओ शायरी, वो कविता और वो बाबा नागार्जुन का शहर में आना एक बहुत ही लंबा बेवकूफी भरा और ईगो से संचालित जीवन जी लेने के बाद अब जाकर मैं हर तरह के नश... Read more
कुटी गाँव और वहाँ के लोगों की तस्वीरें
बताया जाता है कि पांडव जब स्वार्गारोहण को जा रहे थे तो इस स्थान पर लम्बे वक़्त के लिए रुक गए थे. पांडवो की माँ कुंती को ये जगह बहुत भा गयी थी, इस कारण बाद में इस जगह को कुटी के नाम से जाना ग... Read more
देश में गाय की राजनीति का फायदा किसने उठाया?
रात के लगभग 10 बज रहे थे. एक मित्र का जन्मदिन मनाने के बाद मैं अपनी बाइक लेकर श्रीनगर के बिरला कैंपस से अपने हॉस्टल चौरास की तरफ बढ़ रहा था. श्रीनगर से चौरास कैंपस की दूरी बमुश्किल 3 किलोमीट... Read more
ऐसे बनायें घर पर ही शुद्ध पिठ्या
हिन्दू परिवारों में कोई उत्सव हो अथवा पारिवारिक रस्म, पिठ्या (रोली) के बिना रस्म पूरी नहीं होती. अमूमन लोग बाजार से लाये गये पिठ्या का ही उपयोग करते हैं. बाजार से खरीदे जाने वाले पिठ्या में... Read more
अल्मोड़ा की पहाड़ियों में चकोर का जोड़ा
गरुड़ बटी छुटि मोटरा, रुकि मोटरा कोशिअघिला सीटा चान-चकोरा, पछिला सीटा जोशि (Chakor Bird in Almora Uttarakhand) कुमाऊं क्षेत्र में यह चांचरी बड़ी लोकप्रिय है. ऐसे ही लाल बंगला फिल्म में मुकेश... Read more
मोटे चावल के साथ ही कौणी, मादिर का जौला भी खूब उबाल, भुतका के बनता है. अच्छी तरह गल जाने पर इसमें दही, छांछ मिला देते. ऐसे ही चावल को ज्यादा पानी डाल पका लेते. फिर मडुए का आटा पानी में घोल ह... Read more
समाजसेवा और सिक्ख एक दूसरे के पर्याय हैं. पूरे विश्वभर में आपातकालीन स्थितियों में सेवा देने के लिए सिक्ख समाज सबसे पहले नजर आता है. गुरुद्वारों में चलने वाले लंगर से करोड़ों लोग अपनी भूख प्... Read more
























