साठ के दशक में हिमालय अंचल की यात्रा से जुड़ी यादें
चितरंजन दासजी ने उत्तराखंड के हिमालयी तीर्थों की अपनी यायावरी यात्रा को अपनी किताब ‘शिलातीर्थ’ में बहुत ही सजीव और अद्भुत ढंग से सजोया है. 1959 में केदारनाथ और बद्रीनाथ की पैदल य... Read more
स्वाति मेलकानी की कहानी ‘नेपाल में सब ठीक है’
“आपका स्कूल भी बंद है मैडम जी?” खिमदा ने मुझे देखते ही पूछा. जवाब भी उसने खुद ही दे दिया, “इस बार तो बहुत नुकसान हो गया. हमारे मालिक साहब का स्कूल भी कई दिनों से बंद है. बच... Read more
नैनीताल के पास स्थित सैनिक स्कूल घोड़ाखाल की स्थापना 21 मार्च 1966 को रामपुर के नवाब की सुंदर एस्टेट पर हुई थी. (Sainik School Ghorakhal) ‘घोड़ाखाल’ नाम का सम्बन्ध 1857 के प्रथम... Read more
‘बेईमान’ उत्तराखंड मांगे भू-कानून
उत्तराखंड में भूमि बंदोबस्त कराइए, कृषि भूमि बचाने के लिए सशक्त भू कानून लाइए, जमीन की खरीद-फरोख्त को नियंत्रित करने के पुख्ता उपाय कीजिए, पर्वतीय क्षेत्रों में चकबंदी कराइए. हिमाचल की तर्ज... Read more
उत्तराखंड में नाग गढ़पतियों की पूजा
उत्तराखंड में नागों का प्रभाव शिव पूजा में भी प्रबल रहा. ब्रह्मा ने नागों को शाप दिया तो नागों ने पुष्कर पर्वत पर शिव शम्भू की प्रार्थना कर उन्हें प्रसन्न तो किया ही उनके कंठ के हार भी बने .... Read more
तुम खुद ही कामना जगाते हो, खुद ही परेशान होते हो
कुछ लोगों को यह अजीब और असत्य लगेगा, पर सच यही है कि हमारे साथ जो भी होता है, उसके लिए सिर्फ और सिर्फ हम ही जिम्मेदार होते हैं. हमें यह इसलिए अजीब लग सकता है, क्योंकि वास्तविकता को लेकर अमूम... Read more
मिले सुर मेरा तुम्हारा…
संगीत का जादू सर चढ़कर बोलता है लोक का जादुई प्रभाव होता है. इन कथनों की सच्चाई दूरदर्शन के एक विज्ञापन-गीत के जरिए समझ में आई. तत्कालीन सरकार ने तय किया कि देश को विविधता में एकता विषय पर... Read more
उत्तराखंड में आज बड़ी धूम से लोकपर्व हरेला मनाया गया. हरेला पर्व की के दिन जहां दिन भर जगह-जगह वृक्षारोपण के कार्यक्रम हुये वहीं सोर घाटी में हरेला सोसायटी के युवा पारम्परिक अंदाज में लोकपर्... Read more
पिछले सप्ताह हरेला सोसायटी द्वारा अपनी एक गतिविधि ‘हरेला पर लिखो और उपहार पाओ’ के तहत निबंध आमंत्रित किये गये थे. निबंध का विषय ‘हरेला लोकपर्व का पर्यावरण से संबंध’ था. विभिन्न माध्यमों से इ... Read more
हम जब कॉलेज में थे तो एक बार पिकनिक में सातताल गये. धूपचैड़ से आगे बढ़ते ही ऊँचाई से घने बांज के जंगलों के बीच गहराई में बसी झील का जो पहला दृश्य मैंने देखा वह मेरी स्मृति में अभी तक बसा है.... Read more
























