संस्कृति

रमोलिया हाउस में कल होगा नाटक ‘बड़े भाई साहब’ का मंचन

‘काफल ट्री फाउंडेशन’ आप सभी को आमंत्रित करता है प्रेमचंद की कहानी बड़े भाई साहब की नाट्य प्रस्तुति देखने के लिए. प्रमचंद की यह कहानी अपने समय की शिक्षा पद्धति पर गहरा प्रहार थी, जो आज भी उतनी ही प्रासंगिक है. इसी कहानी को आज के संदर्भ में दिखाने की कोशिश करता है यह नाटक. (Play Ramoliya House Haldwani)

नाटक को प्रस्तुत करेंगे शाइनिंग स्टार स्कूल, रामनगर के कलाकार. जिन के द्वारा इस नाटक की कई प्रस्तुतियाँ दी जा चुकी हैं.

नाटक में मूल कहानी की आत्मा को बनाए रखते हुए वर्तमान शिक्षा पद्धति की पड़ताल करने की कोशिश की गयी है. कहानी प्रेमचंद की बड़े भाई साहब की तरह ही आगे बढ़ती है जिसमें बड़ा भाई पढ़ाई को लेकर बहुत ज्यादा चिन्तित दिखता है और छोटा भाई खेलकूद में लगे रह कर अपनी जिंदगी को जीता हुआ आसपास घट रही चीजों से सीखते हुए आगे बढ़ता है. एक भाई लगातार फेल होता जाता है और दूसरा पास. इसी कहानी के माध्यम से आज के संदर्भ की कुछ बातों को एक नेरेटर के माध्यम से कहा गया है. जो नाटक के बीच-बीच में आकर उन प्रश्नों को उठाता है और सबके सामने रखता है.
लेखक हैं मुंशी प्रेमचंद, निर्देशक अमित तिवारी. प्रमुख कलाकार हैं– तूषिता नेगी, कृतिका राणाऔर इशिता.

तो चले आइये कल इतवार, 14 जनवरी 2024 को शाम 5 बजे रमोलिया हाउस, सरस बाज़ार, कालाढूँगी चौराहा, हल्द्वानी. (Play Ramoliya House Haldwani)

युगमंच नैनीताल : रंगमंच और सिनेमा जगत को नामचीन कलाकार देने वाला थिएटर ग्रुप

हमारे फेसबुक पेज को लाइक करें: Kafal Tree Online

काफल ट्री वाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिये यहाँ क्लिक करें: वाट्सएप काफल ट्री

काफल ट्री की आर्थिक सहायता के लिये यहाँ क्लिक करें

Sudhir Kumar

Recent Posts

बचपन से छीन ली गई बचपन की तस्वीर

यह दुनिया की सबसे ख़ूबसूरत तस्वीर है. इस से पहले मैंने ऐसी तस्वीर नहीं देखी,…

7 hours ago

खसों पर हुए वैज्ञानिक अध्ययन

डीएनए, आनुवंशिकी और मानवशास्त्र की दृष्टि से एक वैज्ञानिक समीक्षा भारतीय उपमहाद्वीप के इतिहास में यदि…

2 days ago

वह माला के गेट पर सुबह-शाम पहरा देते मिलता

माला नाम था उसका. छरहरी काया, बला की ख़ूबसूरत. लेडीज साइकिल से जब कॉलेज आती,…

3 days ago

पहाड़ो में भूस्खलन

उत्तराखण्ड का अधिकांश भूभाग हिमालय की पर्वतीय श्रृंखलाओं में स्थित है, जहाँ तीव्र ढाल, गहरी नदी घाटियाँ, युवा…

6 days ago

जर्मन की लड़ाई और रुद्रनाथ की चढाई

पनार बुग्याल के ऊपरी छोर वाले रास्ते पर अब हम चल रहे हैं. पनार चोटी…

6 days ago

हिमालय की सामाजिक-आर्थिक संरचना पर प्रोफेसर पूरन चंद्र जोशी

पिछली कड़ी : कुमाऊं का सबसे बड़ा सामाजिक समूह “खस” रहा : आर. डी. सनवाल सन 1928 में अल्मोड़ा…

6 days ago