आस्था और विश्वास की प्रतीक श्री नंदा देवी की भक्ति में इन दिनों पूरा उत्तराखंड रमा है, अल्मोड़ा भी इस…
उत्तराखण्ड के पहाड़ों में मेले केवल मनोरंजन के अवसर नहीं रहे हैं. वे लोकजीवन की धड़कन, सामाजिक मेल-मिलाप, व्यापार, लोककला, आस्था और सामुदायिक उल्लास…
पिछली कड़ी : बद्रीदत्त पांडे और इंद्र सिंह नयाल ने रखा था ‘उत्तराखंड राज्य की संकल्पना’ का वैचारिक आधार गढ़वाल…
1970 के दशक का उत्तराखण्ड का ‘चिपको आंदोलन’ विश्वविख्यात है. यह तथ्य भी कमोबेश ज्ञात है कि इस आंदोलन के पीछे मुख्य…
पानी बरस रहा है. जब भी पानी बरसता है, देखता हूं पेड़-पौधे बहुत खुश हो जाते हैं. बरामदे की ओर निकला…
राजेसिंह का कहना है कि ‘‘मरोड़ा गांव से लदोली घाट तक का रास्ता उतार-चढ़ाव का न होकर सीधा-सादा है। खतरा यह…
कुमाऊँ में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी केवल भगवान कृष्ण के जन्म का धार्मिक पर्व नहीं रही है, बल्कि यह लोकजीवन, धार्मिक आस्था…
पिछली कड़ी : पहले समाज बदलो, राज्य अपने आप सार्थक हो जाएगा : इंद्र सिंह नयाल इन्द्र सिंह नयाल ने क्षेत्रीय अस्मिता…
पूरी तरह आंचलिक परिवेश में तैयार, "टुकड़ा टुकड़ा जिंदगी" वरिष्ठ इतिहासकार डॉ निर्मल जोशी की नव प्रकाशित कृति है. यह सृजन पाठकों…
ये सितंबर 1994 की सुबह थी जब खटीमा में पूर्व सैनिकों का जुलूस निकल रहा था. पूर्व सैनिकों का ये जुलूस अस्सी…