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अब हल्द्वानी में पहाड़ी उत्पादों के सबसे विश्वसनीय ब्रांड ‘मुनस्यारी हाउस’ की शुरुआत

आपको मुनस्यारी की दुर्लभ राजमा कि तलाश है या फिर कुमाऊं-गढ़वाल के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में पैदा होने वाली जड़ी-बूटियों या मसालों की, या फिर विभिन्न प्रजाति के चावल या दालों की, आपकी मंजिल है मुनस्यारी हाउस. जिसका नया बिक्री केंद्र अब कुमाऊं के प्रवेश द्वार हल्द्वानी में खुल गया है. पता है—काठगोदाम पुलिस चौकी के पास गुरुद्वारे के ठीक सामने हल्द्वानी नैनीताल हाइवे, काठगोदाम में.  (Munsyari House in Haldwani)

मुनस्यारी हाउस विभिन्न प्रकार के पहाड़ी उत्पादों का सब से विश्वसनीय ब्रांड बन चुका है. यहाँ रोज मैरी, स्टीविया, कैमेमाइल, कूट, चिरायता, बालछड़ी, हर्बल टी अतीश इत्यादि के साथ सुगन्धित पौधों और जड़ी-बूटियों से तैयार इम्युनिटी बूस्टर काढ़ा भी मिलता है. मुनस्यारी घाटी के दर्जन भर गाँवों के कई परिवारों द्वारा तैयार अंगूरा, टोपियां, मोजे, दस्ताने, मफलर, पश्मीना, पंखी, स्वेटर जैसे उत्पाद भी यहाँ मिलते हैं जो हथकरघों पर या हाथ से बुने जाते हैं.

‘मुनस्यारी हाउस’ के पास आज कई तरह की दालों, मसालों के अलावा, थुलमा, दन, कालीन, चुटका जैसे ढेरों ऊनी उत्पाद तो हैं ही इसके अलावा तांबे, रिंगाल और ऐपण चित्रकला और तिब्बती कुत्ते भी. मुनस्यारी हाउस आज हर उस उत्पाद को अपने चाहने वालों को उपलब्ध करवाता है जो कि उच्च हिमालयी क्षेत्रों में पाए जाते हैं.

इस तरह हुई थी ‘मुनस्यारी हाउस’ की शुरुआत

उत्तराखण्ड की सीमान्त जोहार घाटी में मिलम के करीबी गांव जलथ में रहने वाले प्रयाग रावत बचपन से ही हिमालय और प्रकृति के प्रेमी हैं. खुद को हिमालय पुत्र कहने वाले प्रयाग रावत के जीवन के शुरुआती 18 साल अपने गांव में कृषि कार्यों में हाथ बंटाते और भेड़-बकरियों के रेवड़ों के साथ बुग्यालों में बीते. शिक्षा पूरी करने के बाद उत्तराखण्ड सरकार में भर्ती हुए तो भी हिमालय और अपने राज्य के लिए कुछ करने का विचार उनके मन में पनपता रहा.

साल 2003 से 2010 तक जब वे नैनीताल में पोस्टेड थे तो अक्सर उनके सहयोगी, पर्यटक और जानने वाले उनसे मुनस्यारी की राजमा और जम्बू, गंद्रायणी जैसे मसाले प्राप्त करने की इच्छा जताते. तभी प्रयाग रावत के मन में यह विचार पलना शुरू हुआ कि जोहार घाटी के अनाज, मसालों, जड़ी-बूटियों और हस्तशिल्प को किस तरह देश दुनिया के सामने लाया जा सके. जिससे ये उत्पाद आसानी से अपने चाहने वालों तक पहुंच सकें और सीमांत के ग्रामीणों को आय भी हो.

मुनस्यारी हाउस का सफ़र जानने के लिए पढ़ें : ‘मुनस्यारी हाउस’ इस तरह पहाड़ी उत्पादों का सबसे विश्वसनीय ब्रांड बना

अपनी सरकारी नौकरी के साथ इस काम को कर पाना प्रयाग रावत के लिए संभव नहीं था. लेकिन जहां कुछ करने की इच्छा हो वहां रास्ते निकल आना ज्यादा मुश्किल नहीं होता. प्रयाग ने इस दिशा में ठोस कदम बढ़ाते हुए जोहार घाटी के ग्रामीणों को जागरूक करना शुरू किया. उनकी माता चन्द्र देवी के संरक्षण में जल्द ही महिला स्वयं सहायता समूह गठित किये जाने लगे. इस तरह पंचाचूली स्वयं सहायता समूह, बुरांश स्वयं सहायता समूह, जय मां काली स्वयं सहायता समूह, कृष्णा स्वयं सहायता समूह गठित हुए. इन समूहों ने स्थानीय उत्पादन, संग्रहण व वितरण का काम शुरू किया. इस तरह ‘मुनस्यारी हाउस’ के ब्रांड ने आकार लेना शुरू किया.

आज मुनस्यारी हाउस मुनस्यारी, कौसानी, बागेश्वर में सफलता के साथ अपने बिक्री केंद्र चला रहा है. अब मुनस्यारी हाउस कुमाऊँ की सबसे बड़ी मंडी हल्दानी में अपने पैर पसार रहा है. अब जिस भी तरह के उच्च गुणवत्ता के पहाड़ी उत्पाद आप चाहते हैं वो आप को यहाँ उपलब्ध हैं. इन बिक्री केन्द्रों के अलावा मुनस्यारी हाउस देश भर के विभिन्न मेलों में अपने स्टाल्स के माध्यम से भी पहाड़ी उत्पादों को पहुंचाता है. (Munsyari House in Haldwani)
-सुधीर कुमार

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Sudhir Kumar

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