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हरेले के रंग में पहाड़ : फोटो निबन्ध

आज उत्तराखंड का लोक पर्व हरेला है जो हरियाली और प्रकृति से जुड़ा है. हरेले का रंग और उत्साह उत्तराखंड के कुमाऊँ की बौरारो (सोमेश्वर) घाटी और लोध में हरेला आने से एक माह पूर्व तब से ही शुरू हो जाता है जब आषाढ़ के पहले दिन से महिलाएँ खेतों में हुड़किया बौल के साथ रोपाई में पूरे उत्साह से जुट जाती हैं. 

हरेले का असली रंग उत्तराखंड के लोक जीवन की उस मान्यता और संस्कृति से जुड़ा है जिसमें प्रकृति को ईश्वर का रूप माना जाता है. रोपाई से पहले 33 करोड़ देवी देवताओं का आह्ववाहन किया जाता है. हरे रंग में डूबी खेतों में अथक परिश्रम करती महिलाएँ बगैर किसी सुविधा के भी बहुत ख़ुश दिखाई देती हैं. उनके लिए ये धरती और हरियाली ही उनका जीवन है. उनके मुस्कुराते चेहरों के पीछे वे अपने कई दुखों को इस हरेले के त्यौहार में बहुत आसानी से छिपा जाती हैं. शायद उन्हें सबसे ज़्यादा ख़ुशी और सुकून इन हरे-भरेखेतों में घुटनों तक भरे पानी और कीचड़ में ही मिलती है.

हरेले के रंग में रंगी उत्तराखंड की ये महिलाएँ दुनिया की सबसे खूबसूरत महिलाओं में से एक हैं जो उत्तराखंड के हरेले के त्यौहार के असल ध्वजवाहक हैं. आप भी देखिए हरेले के रंग में रंगी इन तस्वीरों में दुनिया की सबसे सुंदर और मेहनती उत्तराखंड की महिलाओं को इन ताज़ा तस्वीरों में. 

फोटो व विवरण- जयमित्र सिंह बिष्ट, हिमालयन जेफर, अल्मोडा, उत्तराखंड.

फोटो – जयमित्र सिंह बिष्ट
फोटो – जयमित्र सिंह बिष्ट
फोटो – जयमित्र सिंह बिष्ट
फोटो – जयमित्र सिंह बिष्ट
फोटो – जयमित्र सिंह बिष्ट
फोटो – जयमित्र सिंह बिष्ट
फोटो – जयमित्र सिंह बिष्ट
फोटो – जयमित्र सिंह बिष्ट
फोटो – जयमित्र सिंह बिष्ट
फोटो – जयमित्र सिंह बिष्ट
फोटो – जयमित्र सिंह बिष्ट
फोटो – जयमित्र सिंह बिष्ट
फोटो – जयमित्र सिंह बिष्ट
फोटो – जयमित्र सिंह बिष्ट
फोटो – जयमित्र सिंह बिष्ट
फोटो – जयमित्र सिंह बिष्ट
फोटो – जयमित्र सिंह बिष्ट
फोटो – जयमित्र सिंह बिष्ट
फोटो – जयमित्र सिंह बिष्ट
फोटो – जयमित्र सिंह बिष्ट
फोटो – जयमित्र सिंह बिष्ट
फोटो – जयमित्र सिंह बिष्ट
फोटो – जयमित्र सिंह बिष्ट
फोटो – जयमित्र सिंह बिष्ट
फोटो – जयमित्र सिंह बिष्ट
फोटो – जयमित्र सिंह बिष्ट
फोटो – जयमित्र सिंह बिष्ट
फोटो – जयमित्र सिंह बिष्ट
फोटो – जयमित्र सिंह बिष्ट
फोटो – जयमित्र सिंह बिष्ट

जयमित्र सिंह बिष्ट

अल्मोड़ा के जयमित्र बेहतरीन फोटोग्राफर होने के साथ साथ तमाम तरह की एडवेंचर गतिविधियों में मुब्तिला रहते हैं. उनका प्रतिष्ठान अल्मोड़ा किताबघर शहर के बुद्धिजीवियों का प्रिय अड्डा है. काफल ट्री के अन्तरंग सहयोगी.

इसे भी पढ़ें: कुमाऊँ की खड़ी होली

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  • हरेला का सुंदर पर्व खेती-बाड़ी को बढ़ावा देता है । अद्भुत चित्र, लेखक को बहुल बधाई ।

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