एमबीपीजी महाविद्यालय हल्द्वानी के अंग्रेजी विभाग की विभागाध्यक्ष निलोफर अख्तर अंतर्राष्ट्रीय सेमीनारों में हिस्सेदारी करने विदेश जाती ही रहती हैं. ऐसे ही विदेश दौरों में उनकी मुलाक़ात हुई अपने विषय के कुछ विद्वानों से. इस तरह कुमाऊँ के सबसे बड़े महाविद्यालय में अंतर्राष्ट्रीय महत्त्व के सेमीनार के आयोजन की बात बनी. काफ़ी अड़चनों को पार कर सम्मलेन 8 और 9 जनवरी को आखिरकार आयोजित हुआ. (Two Days International Seminar in MBPG College)
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इस दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का विषय बना ‘जेंडर रोल्स एंड ग्रीन कॉन्सेप्ट पाथवे टूअर्स एनवायरनमेंटल सस्टेनेबिलिटी.’ विषय पर बात रखने के लिए स्थानीय विद्वान् तो थे ही साथ में अलीशिया थीं ताइवान से, डॉ. हेलिनिन हिडाल्गो फिलिपीन्स, मिस लैन और मिस ओआन वियतनाम से. ईरान से डॉ. सूगंद अकबरीयन ने भी ऑनलाइन सेमिनार से जुड़ना तय किया.
इस तरह हल्द्वानी में गंभीर विषय पर सारगर्भित दो दिन की बातचीत के लिए कई बेहतरीन वक्ता तो थे ही श्रोताओं ने भी धैर्य के साथ मन लगा कर विचारों को सुना और ग्रहण किया.
8 जनवरी की सुबह दीप प्रज्ज्वलन और अतिथियों के स्वागत के साथ सेमिनार की शुरुआत हुई. कार्यक्रम कि संयोजक डॉ. नीलोफर अख्तर ने सेमिनार की विषयवस्तु के बारे में तफ़सील से बताया. पहले दिन के मुख्य अतिथि पद्मश्री यशोधर मठपाल ने कहा कि ‘प्रत्येक समाज में महिलाओं को वह सम्मान मिलना चाहिए जिस कि कि वे हकदार हैं. महिलाएं हर काम को तन्मयता के साथ किया करती हैं, उनमें ग़जब की जीवटता होती है.
इंडोनेशिया से आई प्रतिनिधि डॉ. अलीशिया सिनसौ ने इंडोनेशिया के विकास में महिलाओं के योगदान पर चर्चा करते हुए कहा कि ‘महिलाओं को ख़ुद के विकास के बारे में भी सोचना चाहिए.’ उन्होंने कहा कि ‘हम अपने आप को ताकतवर बना सकते हैं और मानवता को शक्तिसंपन्न. पर्यावरण में संतुलन रख सकते हैं, ये एक कठिन प्रक्रिया है लेकिन इस से गुजरा जा सकता है.’ ‘हम दुनिया में बदलाव ला सकते हैं, हम क्योंकि शिक्षकों के तौर पर काम कर रहे हैं अतः हमें शिक्षा पर ही मुख्य ध्यान देना होगा.’ ‘विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार पुरुष, स्त्री, बालक, बालिका सभी को सोचना है कि कैसे वह स्वयं को शक्तिशाली बनाए और जीवन की गुणवत्ता में सुधार करे.’ ‘एक स्त्री बच्चों को जन्म देती है तो गर्भावस्था के दौरान ही उसमें भीतरी बदलाव आ जाता है, इस लिए उस की मदद की जानी चाहिए.’ बच्चों कि अच्छी देखभाल की जाने चाहिए. लेकिन मैंने देखा है औरतें ही बच्चों का लालन-पालन करती हैं पुरुष नहीं.’ ‘मैंने देखा है औरतें घंटों खाना पकाती हैं. मुझे जिसने सबसे अधिक प्यार दिया वह मेरी माँ थी और ख़ुद एक शिक्षक थी.’
ताइवान से पहुँची डॉ हेलिनिन हिडाल्गो ने महिलाओं की पर्यटन में भागीदारी पर चर्चा करते हुए कहा कि— पर्यटन इंसान की बुनियादी जरूरत होनी चाहिए.
कार्यक्रम की संगठन सचिव डॉ. रेखा जोशी ने कहा कि सेमिनार में आए शोध-पत्र जेंडर की भूमिका पर समाज के दिशा निर्देशन में काम करेंगे. आखिर में डॉ. कविता पंत के धन्यवाद ज्ञापन के साथ पहले सत्र का समापन हुआ. सत्र का संचालन किया डॉ. विभा पाण्डे और डॉ. एन. एस. सिद्ध ने. ये तो बताना रह ही गया कि इस सत्र की शुरुआत हुई डॉ. तनूजा मेलकानी की किताब के विमोचन से.
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पहले दिन के दूसरे सत्र में विभिन्न शोध छात्रों ने अपने शोध-पत्र पढ़े. डॉ. सीएस नेगी, डॉ. एनेस सिंह, प्रो. पूर्णिमा भटनागर और रीना शर्मा ने जेंडर की सामाजिक भूमिकाओं के बारे में विस्तार से जानकारी दी. देर शाम सरोद वादक स्मित तिवारी ने सुर बिखेरे तो हर्षिता ने भी कत्थक नृत्य से दर्शकों को मन्त्रमुग्ध कर दिया.
दूसरे दिन की शुरुआत हुई तकनीकी सत्र के साथ. रक्षिता जोशी, प्रज्ञा तिवारी, महेंद्र पाल, उर्वशी टम्टा, भावना मोनी, ललित राणा, भावेश पाठक ने अपने ऑफलाइन शोध पत्र पढे़. इसी के साथ ही 200 से अधिक शोध पत्र ऑनलाइन व ऑफलाइन पढ़े़ गए. कार्यक्रम में आमंत्रित वक्ताओं में स्निग्धा तिवारी, एडवोकेट उच्च न्यायालय नैनीताल, ने मानवाधिकार एवं पर्यावरण अधिकार पर अपने विचार एवं सुझाव रखें. तत्पश्चात फिलिपींस वियतनाम से आई विदेशी प्रतिनिधि डॉ. आंईन तथा डॉ. लेन द्वारा क्रमशः अंतरराष्ट्रीय संबंध व ग्रीन कॉन्सेप्ट तथा ब्राइड किडनैपिंग विषय पर अपने विचार रखें.
अन्य वक्ताओं में प्रोफेसर सी.एस.जोशी प्रोफेसर दिनेश शर्मा प्रोफेसर परवेज अहमद, डॉ. नवल लोहनी, डॉ.धीरज कुमार, डॉ पीयूष त्रिपाठी डॉ रेनू रावत, डॉ प्रियंका सांगुड़ी फुलारा, डॉ.आशीष गुप्ता, डॉ.विपिन पाठक, डॉ. चंद्रावती जोशी द्वारा क्रमशः लिंग समानता, खाद्य सुरक्षा, सोलर टेक्नोलॉजी,मानवाधिकार बायोफर्टिलाइजर, ई गवर्नेंस तथा सतत पोषणीय विकास आदि से सबंधित विषयों पर अपने विचार तथा सुझाव दिए.
कार्यक्रम में सभी माननीय विदेशी प्रतिनिधियों, आमंत्रित वक्ताओं तथा शोधकर्ताओं को प्रमाण पत्र एवं स्मृति चिन्ह से सम्मानित किया गया. कार्यक्रम के अंतिम चरण के समापन समारोह में प्रोफेसर डॉ. सरिता श्रीवास्तव (खाद्य एवं पोषण विभाग अध्यक्ष जीबी पंत कृषि विश्वविद्यालय, पंतनगर) ने पर्यावरण तथा जैव विविधता संरक्षण में महिलाओं की भूमिका व महत्व के बारे में अपना वक्तव्य दिया. उन्होंने स्वरचित कविताओं के माध्यम से उत्तराखंड में महिलाओं के द्वारा की जाने वाली पारिवारिक तथा पारिस्थितिक संतुलन व चुनौतियों के बारे में भी अपने विचार रखे.
अंत में प्रो.नीलोफर अख्तर द्वारा सभी विदेशी प्रतिनिधियों आमंत्रित वक्ताओं, शोधकर्ताओं तथा स्वयंसेवकों को कार्यक्रम को सफल बनाने हेतु धन्यवाद ज्ञापित किया. कार्यक्रम में प्रोफेसर बी. आर पंत प्रोफेसर उषा पन्त डॉ रेखा जोशी डॉक्टर कविता पन्त, डॉ. कविता बिष्ट, डॉ. महेश शर्मा डॉ सुरेश टम्टा, डॉ नवल लोहनी आदि मौजूद रहे. (International Seminar MBPG College
-सुधीर कुमार
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