ललित मोहन रयाल की नई किताब
कलुष पुंज कुंजर मृगराऊ [ललित मोहन रयाल (Lalit Mohan Rayal) कृत ‘अथश्री प्रयाग कथा’ के बहाने प्रयाग के ‘बहबूद के सामाँ’* की पड़ताल] -अमित श्रीवास्तव तुलसीदास जी कहते हैं हाथी के बराबर बड़े पापो... Read more
लीलाधर जगूड़ी को वर्ष-2018 का व्यास सम्मान
प्रसिद्ध कवि लीलाधर जगूड़ी जी को उनकी काव्य रचना ‘जितने लोग उतना प्रेम’ के लिए अखिल भारतीय बिड़ला फाउंडेशन का इस वर्ष का व्यास सम्मान दिया गया है. जगूड़ी जी की कविता, एक बने बनाए शिल्प और आजमा... Read more
वासु चटर्जी की फिल्म: चमेली की शादी
कुछ फिल्में दर्शकों को आज भी बेहद रोमांचित करती हैं. इस तथ्य पर गहनता से विचार करें कि, ऐसा क्यों होता है. क्यों यह फिल्म सोंधी सी लगती है? एक मोहल्ले की कॉमन सी प्रेम-कथा, किन तत्त्वों को ल... Read more
कुंदन शाह निर्देशित और एनएफडीसी निर्मित, यह फिल्म भ्रष्टाचार पर सीधी चोट करती है. सिस्टम, बिजनेसमैन और मीडिया के गठजोड़ पर तीखा व्यंग्य होने के बावजूद, यह फिल्म सरकारी मदद से बन सकी. एनएफडीस... Read more
ऋषिकेश मुखर्जी की कालजयी फिल्म: किसी से न कहना
ऋषिकेश मुखर्जी, दिलचस्प और जीवंत सिनेमा के फन मे माहिर सिनेकार रहे हैं. उनकी फिल्मों में बेहद हल्के-फुल्के अंदाज में सांस्कृतिक विमर्श तो रहता ही था, साथ ही उसमें एक गहरा संदेश भी निहित होता... Read more
‘मैने प्यार किया’ के प्रोड्यूसर बड़जात्या को कौन भूल सकता है. वे निर्देशक सूरज बड़जात्या के पिता थे. बड़जात्या की फिल्मों के बारे मे यह आम राय कायम होकर रह गई कि, वे रामचरितमानस के... Read more
नामवर सिंह: साहित्यिक-वाचिक परंपरा के प्रतिमान
‘तुम बहुत बड़े नामवर हो गए हो क्या.’ नामवर का नाम एक दौर में असहमति जताने का एक तरीका बनकर रह गया था. वक्ता को हैसियत-बोध कराने का मुहावरा. किंवदंती बनने की प्रक्रिया अत्यंत जटिल... Read more
अंगूर, बांग्ला फिल्म भ्रांतिविलास की रीमेक थी, जो ईश्वर चंद्र विद्यासागर के नाटक पर आधारित थी. यह नाटक विलियम शेक्सपियर के ‘द कॉमेडी ऑफ एरर्स’ पर आधारित था. फिल्म की थीम व कई दृश्य हू-ब-हू क... Read more
पिता-पुत्री का घर नीलामी की भेंट चढ़ जाता है. वे नायक के यहाँ शरण लेते हैं, जिसके खुद के हालात शरणार्थी जैसे रहते हैं. झेंप के भाव, क्षमाप्रार्थी की सी भंगिमा. जैसे ही उसके मालिकान की नजर नवय... Read more
फिल्म ‘कथा’ (1982) का बैकड्राप, खरगोश-कछुए की कथा पर आधारित है. बदलते हुए परिवेश में, परिवर्तित होते नैतिक मूल्यों को फिल्म में प्रतीकात्मक ढंग से दिखाया गया है. राजाराम (नसीरुद्दीन शाह) एक... Read more
Popular Posts
- दुर्गम पहाड़ों तक कैसे पहुंचे महाराष्ट्र-गुजरात के पर्व
- पिथौरागढ़ में स्विट्ज़रलैंड बनने की है पूरी क्षमता
- अलमोड़े में नंदादेवी मेले की ताज़ा तस्वीरें
- अहा! कैसा होता था नंदादेवी कौतिक
- सागर से शिखर तक : स्वामी मन्मथन
- उत्तराखण्ड की महिलाएं : स्थितियों, संघर्षों और चुनौतियों का दस्तावेज
- कामिनी तुम कौन?
- पूर्वी नयार नदी की वो बाढ़
- कुमाऊँ की विलुप्त होती जन्माष्टमी पट्ट-चित्र परम्परा
- बद्रीदत्त पांडे और इंद्र सिंह नयाल ने रखा था ‘उत्तराखंड राज्य की संकल्पना’ का वैचारिक आधार
- आकर्षक कलेवर में आंचलिक परिवेश की किताब “टुकड़ा-टुकड़ा जिंदगी”
- भूख न तीस न डर न फिकर छ्, मुट्ट बोटीं छन कसीं कमर छ्
- उत्तराखण्ड के सरोवर
- दौड़ता अल्मोड़ा : फ़ोटो निबंध
- सिंधुजा की कविता : स्मृति यात्रा
- पहले समाज बदलो, राज्य अपने आप सार्थक हो जाएगा : इंद्र सिंह नयाल
- घी संक्रान्ति का लोक विज्ञान
- दुनिया ने अपनाया और अपनों ने भुलाया : जन्मदिन विशेष
- गलगोटिया वाला कॉपी नहीं, असली नवाचार है अल्मोड़ा के रवि टम्टा का ड्रोन
- लोक गायिकाओं का समृद्ध इतिहास रहा है पहाड़ो में
- कुमाऊं केसरी बद्रीदत्त पांडे का बहुआयामी व्यक्तित्व व कृतित्व : इतिहास से जनआंदोलन तक
- उत्तराखण्ड में वन्य-जीवों का आतंक
- उनके बारे में जो सिर्फ नाम नहीं जीवन हैं
- उत्तराखण्ड के आयुष के हाथ में दिल्ली की रणजी टीम की कमान
- उत्तराखण्ड की उन्नति शर्मा ने देश का गौरव बढ़ाया, कॉमनवेल्थ -26 में जीता कांस्य
