उच्च न्यायालय ने NTCA को सौंपा कॉर्बेट पार्क, राज्य सरकार से जताई नाराज़गी

– (काफल ट्री डेस्क)

कॉर्बेट नेश्नल पार्क में बाघ संरक्षण के लिए उत्तराखंड सरकार की ओर से उठाए गए क़दमों पर नाराज़गी ज़ाहिर करते हुए उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने अगले तीन महीने के लिए कॉरबेट टाइगर रिजर्व का प्रबंधन, राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) द्वारा संभाले जाने को कहा है. जस्टिस राजीव शर्मा और लोक पाल सिंह की संयुक्त बैंच ने इस आदेश में कहा है, ”यह कठोर कदम उठाते हुए, हम एनटीसीए से जानना चाहते हैं कि क्या वह एक विशेषज्ञ ऐजेंसी होने के ​नाते, क्या अंतरिम उपाय के तौर पर कॉर्बेट टाइगर रिजर्व (सीटीआर) के प्रबंधन की ज़िम्मेदारी ले सकता, जब तक कि राज्य सरकार अपने कर्तव्यों के प्रति सजग न हो जाए और कोई ठोस निर्णय लेना शुरू करे.”

कोर्ट ने एनटीसीए को यह सुझाव भी देने को कहा है, ”कोर/महत्वपूर्ण इलाक़ों के साथ ही बफ़र ज़ोन्स में समयबद्ध तरीक़े से बाघों की संख्या को संरक्षित करने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जा सकते हैं।” साथ ही कार्ट ने य​ह भी कहा है कि, ”एनटीसीए यह सुझाव देने के लिए स्वतंत्र है कि शिकारियों/और मारे जाने से बचाने के लिए क्या कुछ बाघों को किसी बेहतर प्रबंधन वाले किसी अन्य राष्ट्रीय पार्क या सेंचुरी में स्थानांतरित किया जा सकता है. ” कोर्ट ने एनटीसीए से तीन माह के ​भीतर गहरे अध्ययन के साथ इस रिपोर्ट को तैयार करने को कहा है.

कोर्ट ने यह आदेश, राज्य में वन्य जीवों की सुरक्षा के लिए काम कर रहे एक रामनगर स्थित एनजीओ की ओर से दाखिल एक केस पर चल रही सुनवाई के दौरान दिया है।

कोर्ट ने कॉर्बेट टाइगर रिजर्व, राजाजी नेश्नल पार्क और प्रदेश के अन्य राष्ट्रीय पार्कों में लगातार गिर रही बाघों की संख्या पर चिंता जताई है। ”कोर्ट को इस बाद की गंभीर रूप से चिंता है कि बाघों को शिकारियों से बचाया जाए। हमने राज्य सरकार को आदेश दिय है कि स्पेशल टाइगर प्रोटेक्शन फोर्स बनाई जाए।” कोर्ट ने राज्य सरकार से बेहद नाराजगी ज़ाहिर करते हुए सख़्ती के साथ कहा है, ”हालांकि, हमें नहीं बताया गया है कि इस फोर्स के ​गठन के लिए कौन से ठोस उपाय उठाए गए हैं। बजाय इसके एक बाद एक बहाने बनाकर कोर्ट का समय बरबाद किया जा रहा है।”

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