बुद्ध ने आनंद को वेश्या के पास क्यों जाने दिया
बुद्ध की शरण में दीक्षा ले रहे भिक्षुओं को कई नियमों का पालन करना पड़ता था. वे किसी के भी घर तीन दिन से ज्यादा नहीं रुक सकते थे. यह नियम स्वयं बुद्ध ने बनाया था. उद्देश्य यह था कि उनकी सेवा... Read more
चीना रेंज में घने जंगल के बीच में रांची बिल्कुल सुनसान जगह में था जहां फारेस्ट क्वाटर थे. हमारा घर थोड़ी ऊंचाई पर था तो बाकी क्वाटर उससे नीचे. ज्यादातर वन विभाग के लोगों की ही आवत-जावत होती.... Read more
शराब पीने में उत्तराखंड के पुरुष अव्वल
किसने सोचा था कि एक दिन उत्तराखंड की ऐसी गत होगी. कम से कम अलग राज्य के लिये अपनी जान की कुर्बानी देने से भी न डरने वाले राज्य आन्दोलनकारियों ने तो कभी नहीं सोचा होगा कि जिस अलग राज्य के लिय... Read more
कोतवाल के हुक्के की एफआईआर
“देख शेखू ये बात कुछ ठीक नहीं लग रई!” कार्यक्रम शुरु हुए आधा घण्टा हुआ था और मुझे शेखू दुबे से कही गई अपनी बात रह-रह के याद आ रही थी. तब शेखू दुबे ने कहा था- फिकर की कोई बात न है. पर अब फ़िक... Read more
उत्तराखंड के वीर कफ्फू चौहान की गाथा
उदयपुर परगने की जुवा पट्टी में गंगा नदी के किनारे एक ऊँचे टीले पर ‘उपुगढ़’ स्थित था. उसका शासक उन दिनों चौहान वंशीय युवक कफ्फू चौहान था. उसे अपने गढ़ की स्वाधीनता प्राणों से भी प... Read more
जब कभी कफल्टा हत्याकांड 1980 की बात होती है तो ठीक-ठाक बुद्धिजीवियों का भी यह मत होता है कि जो हुआ वह बुरा हुआ पर इतने साल बाद इस पुरानी बात को याद करने का कोई मतलब नहीं है. सवर्णों के बीच त... Read more
आठवीं का बोर्ड, चेलपार्क और हरित क्रांति
जिस बोर्ड परीक्षा का हव्वा बना कर, सामान्यतया बच्चों को हाईस्कूल में डराया जाता है वो हमारे हिस्से आठवीं में ही आ गयी थी. कई सालों बाद फिर से आठवीं की बोर्ड परीक्षा करवाये जाने का निर्णय हुआ... Read more
दूध का दाम : प्रेमचन्द
अब बड़े-बड़े शहरों में दाइयाँ, नर्सें और लेडी डाक्टर, सभी पैदा हो गयी हैं; लेकिन देहातों में जच्चेखानों पर अभी तक भंगिनों का ही प्रभुत्व है और निकट भविष्य में इसमें कोई तब्दीली होने की आशा न... Read more
लोक कथा : दयामय की दया
किसी समय एक मनुष्य ऐसा पापी था कि अपने 70 वर्ष के जीवन में उसने एक भी अच्छा काम नहीं किया था. नित्य पाप करता था, लेकिन मरते समय उसके मन में ग्लानि हुई और रो-रोकर कहने लगा — (Folklore Dayamay... Read more
अतिक्रमण और उन्हें हटाए जाने की सरकारी प्रक्रिया एक आम बात है किन्तु हल्द्वानी शहर 1992 में हटाये गए अतिक्रमणों को एक लम्बे समय तक याद करता रहेगा और याद करता रहेगा तत्कालीन जिलाधिकारी सूर्य... Read more


























