आज विश्व साइकिल दिवस है
मानव इतिहास की सबसे बड़ी खोजों में से एक खोज रही है पहिये का आविष्कार. पहिये की खोज ने मनुष्य के जीवन को इतना सुगम बना दिया है कि यदि सात समुद्र पार किसी देश में जाना हो तो पहिये के सहारे रन... Read more
पहाड़ की लोक परम्पराओं, लोक आस्थाओं एवं लोकपर्वों की विशिष्टता के पीछे देवभूमि के परिवेश का प्रभाव तो है ही साथ ही यहॉ की विशिष्ट भौगोलिक संरचना भी दूसरे क्षेत्रों से इसे अनूठी पहचान देती है... Read more
साइकिल, उस्ताद और शिक्षा
अपने जमाने में चलन ऐसा नहीं था कि तीन साल का हो जाने पर बच्चे को तिपहिया साइकिल दिलायी जाए और छः साल का होने पर दुपहिया साइड सपोर्टर साइकिल. ड्राइविंग का शौक हमने तार और रबर के पहिये चला कर... Read more
कहाँ से आई अल्मोड़े की बाल मिठाई
अल्मोड़ा और बाल मिठाई तो जैसे एक दूजे के पर्याय हैं. इधर अपने बाल मिठाई कहा उधर अल्मोड़ा ख़ुद-ब-ख़ुद इससे जुड़ जाता है. अल्मोड़ा और बाल मिठाई की यह जोड़ी बीते दिन दुनिया भर में चर्चा का विषय... Read more
नैनीताल में शूट हुई हिट हिन्दी फ़िल्में
चारों तरफ से बांज, देवदार और चिनार से सजी पहाड़ियों के बीच गहरे हरे रंग की यह झील देश दुनिया के आकर्षण का केंद्र है. नैनीताल की इस खूबसूरत झील के साथ देवी-देवताओं के कई पौराणिक किस्से जुड़े... Read more
केदारनाथ के सतत विकास को लेकर किये अपने चार साल के शोध के दौरान मैंने यही पाया कि 2013 की आपदा के बाद केदारनाथ को जिस तरीके से संरक्षित और सुरक्षित किये जाने की जरूरत थी उससे अभी हम कोसों दू... Read more
छिपलाकोट अन्तर्यात्रा: मुड़ मुड़ के न देख
पिछली कड़ी यहां पढ़ें: छिपलाकोट अंतरकथा : जिंदगानी के सफर में, हम भी तेरे हमसफ़र हैं “दस ग्यारह साल की उम्र रही होगी तब से उस पहाड़ पर जाने की जिद करते थे. आपुँ.. हो, कुन्ना बाबू. खूब... Read more
असौज का नाम आते ही पहाड़ में बुतकार लोगों की बाजुएं फड़कने लगती हैं और कामचोरों की सास मर जाती है. पहाड़ में कृषि का कार्य मुख्य रूप से महिलाओं द्वारा किया जाता है इसलिए सबसे ज्यादा आफत महिल... Read more
मौत को लेकर हम आतंकित थे कि जब वह आदमी मरेगा तो यह सारी झंझट होगी कि क्या कहाँ कैसे कब. टुकड़े अस्त व्यस्त बिखरे. मौत के सारे अनजानपन को देखते हुए. उनके सारे टूटे फूटेपन को देखते हुए. उनके,... Read more
भँवर एक प्रेम कहानी, हाल ही में प्रकाशित उपन्यास है. उत्तराखण्ड के सेवानिवृत्त पुलिस महानिदेशक, अनिल रतूड़ीजी, इस कृति के लेखक हैं. साहित्य, संगीत और संस्कृति के प्रति लेखक का अनुराग उनके से... Read more


























