दूध का दाम : प्रेमचन्द
अब बड़े-बड़े शहरों में दाइयाँ, नर्सें और लेडी डाक्टर, सभी पैदा हो गयी हैं; लेकिन देहातों में जच्चेखानों पर अभी तक भंगिनों का ही प्रभुत्व है और निकट भविष्य में इसमें कोई तब्दीली होने की आशा न... Read more
लोक कथा : दयामय की दया
किसी समय एक मनुष्य ऐसा पापी था कि अपने 70 वर्ष के जीवन में उसने एक भी अच्छा काम नहीं किया था. नित्य पाप करता था, लेकिन मरते समय उसके मन में ग्लानि हुई और रो-रोकर कहने लगा — (Folklore Dayamay... Read more
अतिक्रमण और उन्हें हटाए जाने की सरकारी प्रक्रिया एक आम बात है किन्तु हल्द्वानी शहर 1992 में हटाये गए अतिक्रमणों को एक लम्बे समय तक याद करता रहेगा और याद करता रहेगा तत्कालीन जिलाधिकारी सूर्य... Read more
पहाड़ियों के प्यारे काफल के सेहतमंद फायदे
काफल का तो नाम सुनते ही हर पहाड़ी यादों के गहरे समुद्र में खो जाता है. हर पहाड़ी के पास काफल को लेकर कोई न कोई किस्सा जरुर होता है. ठेठ पहाड़ियों के काफल खाने के तरीके सुनकर तो मुंह में पानी... Read more
बद्री क्षेत्र में निवास करते हैं पंच बद्री
चारों युगों में बद्रीनाथ धाम चार अलग-अलग नामों से जाना गया है. सतयुग में बद्रीनाथ धाम का नाम मुक्तिप्रद क्षेत्र, त्रेता युग में योगसिद्धि प्रद क्षेत्र, द्वापर युग में विशाला नाम से जाना जाने... Read more
यह उत्तराखण्ड के लिए कफल्टा में हुए दलित नरसंहार को याद करने का महीना है. मई 1980 उत्तराखण्ड के इतिहास की सबसे काली तारीखों में से एक है. इस दिन कुमाऊं के कफल्टा नाम के एक छोटे से गाँव में थ... Read more
अमरीकी नस्लवाद बनाम भारतीय जातिवाद
-मनीष आज़ाद 26 फरवरी की रात 2012 को अमेरिका के ‘फ्लोरिडा’ नामक शहर में ‘ट्रायवान मार्टिन’ नामक व्यक्ति को ‘जिम्मरवान’ नामक व्यक्ति ने गोली मार दी. मार्टिन की मौके पर ही मौत हो गयी. इस घटना का... Read more
सानन थैं पधान हो कयो, रात्ति में बांगो
हमारे अंचल में एक किस्सा प्रचलित है, कहा जाता है कि किसी जमाने में, जब पेड़-पौधे, पंछी-जानवर इंसानों की तरह बात करते थे. उस जमाने में जानवरों ने अपना प्रधान शेर को बनाया तो पंछियों ने चील को... Read more
ईद की सिवईं में और ज्यादा मिठास घोलने वाली खबरें
आस बँधाते लोग, उम्मीद जगाती खबरें हम ऐसे दौर से गुजर रहे हैं जब पूरे देश में सांप्रदायिक घृणा भड़काने की हर मुमकिन कोशिश की जा रही है, इस घृणा को हिंसा में तब्दील करने में भी कोई कसर नहीं छोड़... Read more
लोक कथा : श्राद्ध की बिल्ली
किसी जमाने की बात है. एक गांव में सास-बहू रहा करते थे. जैसा की पहाड़ों के हर घर में होता है कि लोग पालतू जानवर रखा करते हैं. सास-बहू ने भी एक बिल्ली पाल रखी थी. वह बिल्ली हमेशा कभी सास तो कभ... Read more


























