पहाड़ की सिन्ड्रेला ‘सूनिमाया’ की कहानी
यहाँ नेपाल की एक मनमोहक लोककथा हिंदी में प्रस्तुत है, जिसमें एक मासूम लड़की सूनिमाया की कहनी बयां की गई है. यह कहानी सौतेली माँ के दुर्व्यवहार, एक पिता के प्रेम, और नेकदिल प्राणियों की मदद स... Read more
नगरूघाट मेला : यहाँ लगती है “मितज्यू” की अनूठी डोर
उत्तराखंड की मिट्टी में लोक परंपराओं की खुशबू रची-बसी है. हर पर्व, हर मेला यहाँ सिर्फ उत्सव नहीं होता, बल्कि सामाजिक एकता और मानवता का प्रतीक भी बन जाता है. ऐसी ही एक अद्भुत परंपरा का गवाह ह... Read more
वह रील्स भी बनाती है और रन भी: आज की बेटी जेमिमाह
“रन बनाना? वो क्या होता है! मेरा क्रिंज रील देखो और गाना सुनो.” ये शब्द एक जमाने में उनके खिलाफ सोशल मीडिया पर हथियार की तरह इस्तेमाल होते थे. लेकिन आज, DY पाटिल स्टेडियम में लिख... Read more
सीएमएस की कुर्सी और सिस्टम का पोस्टमार्टम ?
इन दिनों बागेश्वर जिला अस्पताल भीतर ही भीतर सुलग रहा है. सिस्टम किसी के भी संभालते सँभल नहीं पा रहा है. अस्पताल की सभी व्यवस्थाओं की देखरेख के लिए ज़रूरी सीएमएस की कुर्सी खाली पड़ी है. कहा ज... Read more
‘मनमोहन सिंह’ उम्मीदों से भरा सफर :
1991 से देश में आर्थिक क्रांति हुई जो निःसंदेह 1947 में नेहरू द्वारा की गई राजनीतिक क्रांति से कहीं अधिक असरदार थी. अस्सी के दशक में देश आतंरिक अस्थायित्व यानी बेरोजगारी और मुद्रा स्फीति के... Read more
‘भूतगांव’ पहाड़ की नब्ज पकड़ता उपन्यास
पत्रकार -उपन्यासकार नवीन जोशी के उपन्यास पढ़ना, पहाड़ की नब्ज पकड़ कर शिद्दत से उसके हाल-हालात जानना और महसूस करना है. फिर चाहे वह उनका चर्चित उपन्यास ‘दावानल’ हो, ‘टिकटशुद... Read more
अपनी माटी में बेटी की वापसी
6 सितंबर 2007, एक तारीख जो कैलेंडर में सिर्फ एक दिन थी, पर हमारे जीवन में वह एक अध्याय बन गई. 6 सितंबर 2007 का वो दिन था जब पांच जिज्ञासु यात्रियों का एक दल ऊं पर्वत, आदि कैलाश, सिनला दर्रा... Read more
हर साल की तरह, इस बार भी 15 जून 2025 को उत्तराखंड के प्रसिद्ध कैंची धाम में बाबा नीम करोली महाराज के स्थापना दिवस के अवसर पर विशाल मेला आयोजित होने जा रहा है. यह मेला न केवल उत्तराखंड बल्कि... Read more
ऐसे बीज बिछा रे, सुख चैन उगे दुख दर्द मिटे
पिछली कड़ी : डी एस बी के अतीत में ‘मैं’ डी एस बी मेरे लिए इसलिए भी खास बना रहा कि मेरा बचपन इसी की परिधि में बीता. वहीं घर था सरकारी, अंग्रेजों के समय का बना. टीन की छत, भीतर की तरफ लकड़ी लगी... Read more
‘हेमवंती’ जहां मोहब्बत मजबूरी नहीं ताकत बन जाती है
गढ़वाल और कुमाऊं अंचल ने संस्कृति के उन्नयन और उत्थान हेतु नित नए मील के पत्थर खड़े किए हैं, इसी कड़ी में 24 अप्रैल को रिलीज हुई गढ़वाली मूवी हेमवंती का जिक्र बहुत जरूरी प्रतीत होता है. जहां... Read more



























