असल आवाज का जादू नकलची नहीं समझेंगे
असल आवाज का जादू नकलची नहीं समझेंगे -राहुल पाण्डेय कुछ साल पहले अयोध्या में एक शायद कभी न बनने वाली फिल्म के लिए ऑडिशन ले रहा था. कला की गर्मी में उबलते लोगों की कतार लगी थी, पर हम ठंडे होते... Read more
एक युवा कवि को पत्र – 1 – रेनर मारिया रिल्के
“एक युवा कवि को पत्र” महान जर्मन कवि रेनर मारिया रिल्के के लिखे दस ख़तों का संग्रह है. ये ख़त जर्मन सेना में भर्ती होने का विचार कर रहे फ़्रान्ज़ काप्पूस नामक एक युवा को सम्बोधित... Read more
हंटरवाली की कहानी
बीसवीं शताब्दी के उस दौर में वाडिया बंधु उस दौर में हंटरवाली के निर्माण की योजना बना रहे थे जब दुनिया भर में दुनिया खुद को नए सिरे से ईजाद करने में लगी हुई थी. भारत अंग्रेजों को गुलाम था. 30... Read more
आषाढ़ -लीलाधर जगूड़ी यह आषाढ़ जो तुमने मां के साथ रोपा था हमारे खेतों में घुटनों तक उठ गया है अगले इतवार तक फूल फूलेंगे कार्तिक पकेगा हमारा हँसिया झुकने से पहले हर पौधा तुम्हारी तरह झुका हुआ ह... Read more
सूरज की मिस्ड काल – 5
दुआओं के एंटीबॉयटिक का फ़ौरन असर होता है सूरज भाई पेड़ की फ़ुनगियों से झांक रहे हैं. पीटी मास्टर सरीखे किरणों, उजाले, रोशनी , प्रकाश को इधर-उधर पसरने, छा जाने का संकेत दे रहे हैं. ऊर्जा-सीटी बज... Read more
ग़ाज़ियाबाद की निम्न मध्यवर्गीय बस्ती प्रताप विहार में पली-बढ़ी पुष्पा रावत के लिए वह दिन बहुत निर्णयात्मक साबित हुआ जब उनके हाथ में कैमरा चलाने का हुनर आया. साल 2000 के आसपास उन्हें दिल्ली के... Read more
वे दिखा रहे हैं क्योंकि जनता आँखों पर पट्टी बाँधे जादूगर का खेल देखना चाहती है
भारत को चाहिए जादूगर और साधु – हरिशंकर परसाई हर 15 अगस्त और 26 जनवरी को मैं सोचता हूँ कि साल-भर में कितने बढ़े. न सोचूँ तो भी काम चलेगा – बल्कि ज्यादा आराम से चलेगा. सोचना एक रोग... Read more
उत्तराखण्ड का इतिहास भाग- 4
उत्तराखण्ड की प्रमुख पुरा प्रजातियाँ- उत्तराखंड सदियों से ही मानव आवास के लिये उपयोग में आती रही है. यहाँ की सौन्दर्यमय घाटियाँ, प्राकृतिक वनस्पतियों से समृद्ध पर्वत, जल से भरपूर नदियाँ, शां... Read more
गांधी जयंती 2018: ‘मैं हिमालय की गोद में बैठा हूं’
आजादी की चेतना जगाने के लिए कुमाऊं के कई इलाकों में महात्मा गांधी घूमे. लेकिन कौसानी उनको इतना भाया कि उन्होंने यहां लंबा प्रवास किया. बापू 24 जून 1929 को कौसानी पहुंचे और 7 जुलाई तक यहां रु... Read more
पाब्लो नेरुदा से एक बातचीत – दूसरा और अंतिम हिस्सा
(पिछले हिस्से का लिंक – पाब्लो नेरुदा से एक बातचीत) पाब्लो नेरुदा (12 जुलाई 1904 – 23 सितंबर 1973) की रहस्यमय -सी मृत्यु पर हिन्दी दुनिया में विशेष चर्चा नहीं हुई‐ शायद इसलिए कि... Read more


























