छूट प्रथा : उत्तराखंड के जौनपुर की प्रथा
उत्तराखंड में टिहरी गढ़वाल में एक खुबसूरत पहाड़ी क्षेत्र है जौनपुर. यमुना के बांयी तरफ स्थित जौनपुर का यह क्षेत्र अपनी विशिष्ट सांस्कृतिक परम्पराओं, रीति-रिवाज, खान-पान के लिये जाना जाता है. ज... Read more
मेरी माँ अब नहीं हैं लेकिन वह नदी अब भी है
आज से नब्बे साल पहले यानी 3 अप्रैल 1929 को शिमला (हिमाचल प्रदेश) में जन्मे निर्मल वर्मा अपने विशिष्ट गद्य के लिए जाने जाते रहे हैं. आज उनके जन्मदिवस पर पढ़िए उनका एक विचारोत्तेजक लेख: मेरे लि... Read more
वनवासियों की व्यथा- समाधान की चिंता
वनवासियों की व्यथा का यह अंतिम हिस्सा है. इस हिस्से में फरवरी माह से हुये नवीनतम घटनाक्रम वर्णित है. इस मामले में अभी भी सुप्रीम कोर्ट में कारवाई चल रही है जिसपर आगे भी लेख प्रकाशित किये जाय... Read more
पहाड़, भाबर व तराई वाले तीन तरह की भूमि के मिश्रणों वाली नैनीताल लोकसभा सीट अपने पहले लोकसभा चुनाव के दिनों से ही ऐसी है. राज्य बनने से पहले इसमें उत्तर प्रदेश के बरेली जिले की बहेड़ी विधानस... Read more
4G माँ के ख़त 6G बच्चे के नाम
आज से काफल ट्री के पाठकों के लिए गायत्री आर्य का कॉलम शुरू किया जा रहा है. ये कॉलम एक खत के रूप में है. जिसमें एक आधुनिक माँ प्रेगनेंसी से लेकर लेबर रूम तक के अपने अनुभवों को ख़त के माध्यम से... Read more
दिल्ली फिर एक बार
कहो देबी, कथा कहो – 39 पिछली कड़ी- कहो देबी, कथा कहो – 38 तो, परिवार को साल भर के लिए लखनऊ में अकेला छोड़ कर मैं दिल्ली आ गया. समय के साथ कितनी बदल गई थी दिल्ली! पहली बार सन् 1958 में उसे तब द... Read more
जब लता मंगेशकर को 500 रुपये मिलते थे, के. आसिफ ने उन्हें एक गाने के 25000 रुपये दिए थे
पटियाला घराने के खलीफा गायक उस्ताद बड़े गुलाम अली खान साहब का जन्म आज ही दिन यानी 2 अप्रैल 1902 को ब्रिटिश भारत की पंजाब रियासत के कसूर नामक स्थान पर हुआ था. विभाजन के बाद कसूर पाकिस्तान का ह... Read more
पहाड़ और मेरा जीवन –27 मैं आप लोगों को इस बार केंद्रीय विद्यालय पिथौरागढ़ का किस्सा सुनाने जा रहा हूं. उन दिनों मैं कक्षा सात में पढ़ता था. जैसा कि मैंने आपको पहले बताया था कि कैसे एक रात मे... Read more
यह विडम्बना ही है कि जब तक करम सिंह जीवित रहे, वे अन्जान बने रहे. अब जब वह नहीं हैं, हम उनकी खोज कर रहे हैं. अब उनके बारे में यथेष्ठ और प्रमाणिक जानकारी नहीं है. 1966 में जब मैंने अपने अध्यय... Read more
पहाड़ में काफल पक चुके हैं
काफल पाको चैता बसंत अब विदा होने को है और काफल पकने को तैयार हैं. ऋतु परिवर्तन के बीच कई जगह वक़्त से पहले भी काफल का पक जाना देखने में आता रहा है लेकिन चैत के महीने में इसके पक जाने का जिक्र... Read more


























