अल्मोड़ा का सामूहिक संध्यावंदन और विदेशी लाल परी
कॉटेज नंबर सी 09, जिसमें अल्मोड़ा के आरंभिक दिनों में प्रवास का मौका मिला था, के अगल-बगल, आगे-पीछे की तरफ कुल जमा तेरह चौदह कॉटेज और भी थीं. जिनमें काफी कुछ आबाद थीं.... Read more
फायदेमंद है जोंक से अपना खून चुसवाना
बरसात के मौसम में पहाड़ी इलाकों में जोंकें देखी जाती हैं. स्थानीय लोग तो इसके अभ्यस्त हो जाते हैं लेकिन मैदानी इलाकों से छुट्टियाँ बिताने पहाड़ आने वाले अप्रवासी और पर्यटक जोंकों से खौफ़जदा... Read more
उत्तराखण्ड देवभूमि में लगभग 2000 मीटर तक की ऊंचाई तक चिर पाइन यानी भारतीय चीड़ के जंगल मिल जाएंगे, ऊंचे-ऊंचे दरख़्त नोंकदार पत्तियां और भूरे लाल रंग के तने के साथ. आप को बताऊं ये केवल चीड़ क... Read more
माँ मुनव्वर राणा हँसते हुए माँ बाप की गाली नहीं खातेबच्चे हैं तो क्यों शौक़ से मिट्टी नहीं खाते हो चाहे जिस इलाक़े की ज़बाँ बच्चे समझते हैंसगी है या कि सौतेली है माँ बच्चे समझते हैं हवा दु... Read more
किताबों और शिक्षकों के लिये धरना कॉलेज के हित में नहीं है : पिथौरागढ़ जिला प्रशासन
जैसा की हमने अपनी पिछली ख़बरों में बताया था कि पिथौरागढ़ कॉलेज के छात्र लगातार सोलहवें दिन किताब और शिक्षकों की मांग को लेकर कॉलेज परिसर में धरना दे रहे हैं ऐसे में पिथौरागढ़ प्रशासन ने छात्र स... Read more
उत्तराखंड के पूर्व राज्यपाल सुदर्शन अग्रवाल की मृत्यु हो गयी है. सुदर्शन अग्रवाल उत्तराखंड के अतिरिक्त उत्तर प्रदेश और सिक्किम के भी राज्यपाल रहे थे. सुदर्शन अग्रवाल उत्तराखंड के दूसरे राज्य... Read more
पहाड़ी जाड़े की सौग़ात: सना हुआ नींबू
पहाड़ी नींबू करीब करीब बड़े दशहरी आम जितने बड़े होते हैं. माल्टा मुसम्मी और संतरे के बीच का एक बेहद रसीला फल होता है. ताज़ी पहाड़ी मूली में ज़रा भी तीखापन नहीं होता. भांग के बीजों में नशे जै... Read more
जब हल्द्वानी में पहली बार आई बिजली
1949-50 से पहले हल्द्वानी में सार्वजनिक प्रकाश व्यवस्था के लिये अधिकतर जगहों पर कैरोसिन तेल के लैम्प जलाये जाते थे. 1929-30 में हल्द्वानी शहर में प्रकाश की व्यवस्था ठेके पर चल रही थी. 1940-4... Read more
गुमदेश के मेरे पुरखों के किस्से
गुमदेश के मेरे पुरखों के किस्से –बटरोही मेरा जन्म अल्मोड़ा जिले की मल्ला सालम पट्टी के छानागाँव में हुआ था. पुरखे बताते थे कि कई पीढ़ी पहले वे लोग भारत-नेपाल की सीमा पर बहने वाली काली... Read more
आषाढ़ की काली धूप संग पहाड़ों में रोपाई
पहाड़ के लोगों और आषाढ़ की काली धूप का हमेशा से गहरा नाता रहा है. आषाढ़ की इसी काली धूप में लगती है रोपाई. उत्तराखंड में धान की बुआई के लिये लगाई जाने वाली रोपाई जिसे गढ़वाल में रोपणी भी कहते है... Read more


























