देहरादून से विकासनगर होते हुए एक रास्ता जौनसार बावर के लिए चल पड़ता है. इस रास्ते में उत्तराखंड के खूबसूरत पर्यटन स्थलों में से एक पड़ता है चकराता. देवदार के घने जंगलों के बीच मनमोहक चकराता... Read more
बच्चे कैसे जिएंगे हिंसक होते जा रहे समाज में
4G माँ के ख़त 6G बच्चे के नाम – ग्यारहवीं क़िस्त पिछली क़िस्त का लिंक: कुदरत और संगीत का मरहम सारी दुनिया में फैला पड़ा है मेरे बच्चे! जिस बात का डर था वही हुआ. मैं नहीं चाहती थी कि तुम्हारे... Read more
गंगा मंदिर मुखीमठ: गंगा मैया का शीतकालीन प्रवास
उत्तरकाशी गंगोत्री रोड पर 73 किमी की दूरी पर बसे खूबसूरत गाँव हरसिल को भला कौन नहीं जानता. हरसिल से ही भागीरथी नदी को पार कर लगभग 3.50 किमी की दूरी तय करने के बाद आता है मुखबा. हरसिल से 3 कि... Read more
बचपन के उन दिनों गांव से आने वाला कोई परिजन या अन्य ग्रामीण जब घर से आई समौण (सौगात) के तौर पर एक-दो पोटलियां मां के हाथ में सौंपता था तो हमारी निगाह उसके अंदर अखरोट, च्यूड़े, नारंगी और माल्... Read more
जब संपादकीय टिप्पणी के साथ ‘जनजागर’ के मुखपृष्ठ पर मेरी कविता प्रकाशित हुई
पहाड़ और मेरा जीवन – 38 (पिछली कड़ी: एक शराबी की लाश पर महिलाओं के विलाप ने लिखवाई मुझसे पहली कविता ) आठवीं से नवीं में आने के सफर के दौरान मुझे खुद में दो बदलाव साफ दिखाई दिए- पहला तो मैं छ... Read more
उत्तराखंड में वैडिंग डेस्टिनेशन की संभावनाएं
हाल ही में औली में किसी गुप्ता परिवार के बेटों का विवाह हुआ जिसके बाद मुख्यमंत्री ने अपने फेसबुक अकाउंट में कुछ तस्वीरें साझा की. इन तस्वीरों के साथ मुख्यमंत्री ने लिखा पर्यटन, स्थानीय स्तर... Read more
उत्तराखण्ड के गढ़वाल मंडल के उत्तरकाशी जिले में है हरसिल. हरसिल उत्तरकाशी गंगोत्री मार्ग पर 72 किमी की दूरी पर है. मनोरम पर्यटन स्थल के तौर पर जाना जाने वाला हरसिल भारत के प्रमुख सैन्य अड्डो... Read more
हमारे एक कुमाउंनी मित्र ने कुछ समय पूर्व अपनी आंखों का आपरेशन कराया. उन्हें मोतियाबिंद हो गया था. मिलने पर जब बातचीत हुई तो उन्होंने आंखों में ‘बडू जाव’ शब्द का प्रयोग किया, मोतियाबिंद का नह... Read more
इष्टदेव से न्याय पाने की गुहार है घात डालना
यूँ तो घात लगाने का सामान्य अर्थ होता है, शिकायत, चुगली अथवा किसी अन्य व्यक्ति के खिलाफ कही गयी बात को पीछे से उस तक पहुंचाना. किन्तु एक वाक्यांश के रूप में क्रियांश ‘डालना’ से इसका अर्थ बदल... Read more
क्या कालिदास का जन्मस्थान उत्तराखंड में है?
कालिदास विश्व में सर्वाधिक पढ़े जाने वाले लेखकों में हैं. उनकी पुस्तक अभिज्ञानशाकुन्तलम पहली भारतीय पुस्तक है जिसका किसी यूरोपीय भाषा में अनुवाद किया गया. पिछले कई वर्षों से न जाने कितने लोगो... Read more


























